
कोरबा(आई.बी.एन -24) कोरबा जिला में अंतराष्ट्रीय मानव अधिकार एसोसिएशन छत्तीसगढ़ का शपथ ग्रहण समारोह एवं जनजागरुकता कार्यक्रम तुलसी नगर सामुदायिक भवन कोरबा में हुआ संपन्न, कार्यक्रम में प्रमुख रूप से प्रदेश अध्यक्ष राकेश महौत राष्ट्रीय विधि महासचिव प्रभारी छत्तीसगढ़ एवम तेलंगाना ,वरिष्ठ अतिथि पथराम सिंह, प्रदेश उपाध्यक्ष वरिष्ट अतिथि विकास कुमार जिला सचिव NCB वरिष्ठ अतिथि बलाई दास जिला संरक्षक टकेश्वर यादव वरिष्ठ अतिथि सहित अन्य लोग मौजूद रहे कार्यक्रम में मुख्य रूप से मानव अधिकार से तात्पर्य उन सभी अधिकारों से है जो व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता, समानता एवं प्रतिष्ठा से जुड़े हुए हैं। यह सभी अधिकार भारतीय संविधान के भाग-तीन में मूलभूत अधिकारों के नाम से वर्णित किए गए हैं और न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय है, जिसकी ‘भारतीय संविधान’ न केवल गारंटी देता है, बल्कि इसका उल्लंघन करने वालों को अदालत सजा भी देती है। वैसे तो भारत में 28 सितंबर, 1993 से मानव अधिकार कानून अमल में लाया गया था।
सब लोग गरिमा और अधिकार के मामले में स्वतंत्र और बराबर हैं अर्थात सभी मनुष्यों को गौरव और अधिकारों के मामले में जन्मजात स्वतंत्रता और समानता प्राप्त है। उन्हें बुद्धि और अंतरात्मा की देन प्राप्त है और परस्पर उन्हें भाईचारे के भाव से बर्ताव करना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति को बिना किसी भेदभाव के सभी प्रकार के अधिकार और स्वतंत्रता दी गई है। नस्ल, रंग, लिंग, भाषा, धर्म, राजनीतिक या अन्य विचार, राष्ट्रीयता या समाजिक उत्पत्ति, संपत्ति, जन्म आदि जैसी बातों पर कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता। चाहे कोई देश या प्रदेश स्वतंत्र हो, संरक्षित हो, या स्वशासन रहित हो, या परिमित प्रभुसत्ता वाला हो, उस देश या प्रदेश की राजनैतिक क्षेत्रीय या अंतर्राष्ट्रीय स्थिति के आधार पर वहां के निवासियों के प्रति कोई फर्क नहीं रखा जाएगा। प्रत्येक व्यक्ति को जीवन, आजादी और सुरक्षा का अधिकार है। गुलामी या दासता से आजादी का अधिकार, अर्थात किसी भी व्यक्ति को गुलामी या दासता की हालत में नहीं रखा जा सकता, गुलामी-प्रथा और व्यापार पूरी तरह से निषिद्ध होगा। यातना, प्रताड़ना या क्रूरता से आजादी का अधिकार अर्थात किसी को भी शारीरिक यातना नहीं दी जा सकती और न किसी के भी प्रति निर्दय, अमानवीय या अपमानजनक किया जा सकता है।
कानून के सामने समानता का अधिकार अर्थात हर किसी को, हर जगह कानून की निगाह में व्यक्ति के रूप में स्वीकृति-प्राप्ति का अधिकार है। कानून के सामने सभी को समान संरक्षण का अधिकार अर्थात कानून की निगाह में सभी समान हैं और सभी बिना भेदभाव के समान कानूनी सुरक्षा के अधिकारी हैं, अपने बचाव में इंसाफ के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाने का अधिकार, अर्थात सभी को संविधान या कानून द्वारा प्राप्त बुनियादी अधिकारों पर किसी के द्वारा अतिक्रमण किए जाने पर समुचित राष्ट्रीय अदालतों की सहायता पाने का अधिकार है। मनमाने ढंग से की गई गिरफ्तारी, हिरासत में रखने या निर्वासन से आजादी का अधिकार, अर्थात किसी को भी मनमाने ढंग से गिरफ्तार, नजरबंद, या देश-निष्कासित नहीं किया जा सकता। किसी स्वतंत्र आदालत के जरिए निष्पक्ष सार्वजनिक सुनवाई का अधिकार अर्थात सभी को समान रूप से यह अधिकार है कि उनके अधिकारों और कर्तव्यों के मामले में और फौजदारी के किसी मामले में उनकी सुनवाई अदालत द्वारा न्यायोचित और सार्वजनिक रूप से निरपेक्ष एवं निष्पक्ष हो।