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चाकाबूड़ा में ग्रामसभा बना गड़बड़ी का भंडाफोड़ मंच – घोटालेबाजों की खुली पोल, गांव मांगे जवाब।

 

चाकाबूड़ा / कोरबा (आई.बी.एन -24) ग्राम पंचायत चाकाबूड़ा में आज आयोजित ग्रामसभा एक ऐतिहासिक और निर्णायक पड़ाव बन गई, जहां वर्षों से दबे भ्रष्टाचार की चुप्पी टूटी। जनपद और जिला प्रशासन के अधिकारियों के सामने ग्रामीणों ने खुलकर आरोपों की बौछार की और संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की मांग की।

गांव का गुस्सा, दर्द और सवाल – एक ही मंच पर फूटा
ग्रामवासी रति राम सिदार ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर उनसे ₹20,000 की अवैध वसूली की गई, जिसका आरोप पूर्व उपसरपंच जितेंद्र जोशी पर है।
मनरेगा कार्यों में फर्जी मस्टर रोल, अधूरे निर्माण, और अपनों को फायदा पहुंचाने के लिए सरकारी जमीनों का अवैध पट्टा वितरण गंभीर आरोपों में शामिल है।
सबसे चिंताजनक बात यह सामने आई कि शिकायत करने वाले ग्रामीणों को धमकाकर चुप रहने का दबाव बनाया गया, ताकि वे ग्रामसभा में सच्चाई उजागर न कर सकें
पंचायत सचिव और रोजगार सहायक पर लगे गंभीर आरोप:


गांव के जागरूक नागरिकों ने एक लिखित शिकायत में पंचायत सचिव रजनी प्रधान और रोजगार सहायक अंजू सिदार के खिलाफ भी भ्रष्टाचार के कई ठोस सबूत प्रशासन के सामने रखे:
1. मनरेगा में घोटाला – कार्यस्थल पर बिना काम के मस्टर रोल भरकर लाखों रुपये का गबन।
2. प्रधानमंत्री आवास योजना में अपात्रों को लाभ, पात्रों को वंचित किया गया।
3. शौचालय योजना में अधूरे निर्माण, लेकिन भुगतान पूर्ण।
4. सीसी रोड और नाली निर्माण में घटिया सामग्री, फिर भी पूरी राशि की निकासी।
5. पाइपलाइन का निजी उपयोग, जिससे सार्वजनिक जलापूर्ति प्रभावित।
6. शासकीय भूमि पर अवैध निर्माण, निजी भवन बनाए गए।
7. फर्जी हस्ताक्षर से ग्रामसभा की बैठकें दर्ज, असली बैठकें नहीं हुईं।
8. आय से अधिक संपत्ति अर्जन, जांच की मांग।
9. मनरेगा में फर्जी मास्टर रोल फर्जी हाजरी का बंदरबांट
10. गांव की औषधालय ज़मीन बेच दी गई, ग्रामीणों ने किया विरोध।
11. अवैध नियुक्ति का संदेह, पूर्व में शिक्षक घोटाले में दोषी रही सचिव
जांच अधिकारियों का बयान:
शिकायतें गंभीर हैं, योजनाएं अधूरी हैं। रिपोर्ट जनपद को सौंपेंगे और आवश्यकतानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी
गांव की आवाज:
हमारे हक़ का पैसा किसकी जेब में गया?
कब तक झूठ और लूट चलेगी?
अब गांव में एक ही आवाज है:
“भ्रष्टाचार बंद करो – जवाब दो!”

समाप्ति की घोषणा:
अब गांव खामोश नहीं – सच्चाई की लड़ाई का एलान है ये।
चाकाबूड़ा से उठी आवाज़ अब गूंजेगी शासन के गलियारे तक!

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