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संत कबीर के 629वें प्राकट्य दिवस पर पाली नगर में उमड़ा आस्था का सैलाब।

हाथों में श्वेत ध्वज, होंठों पर कबीर वाणी और दिलों में एकता का संकल्प।

 

तपती धूप भी नहीं रोक सकी कदम, संत कबीर के जयघोष से गूंज उठा पूरा नगर; युवाओं को मिला संस्कार और समाज सेवा का संदेश।

पाली (आई.बी.एन -24) भरी दोपहरी की तपती धूप… माथे पर पसीना… हाथों में श्वेत ध्वज… होंठों पर सतगुरु कबीर साहेब की जय का उद्घोष और हृदय में अटूट श्रद्धा। यह दृश्य था पाली नगर में आयोजित संत शिरोमणि सद्गुरु कबीर साहेब के 629वें प्राकट्य दिवस का, जहाँ सैकड़ो श्रद्धालुओं ने अपनी उपस्थिति से यह सिद्ध कर दिया कि संतों की वाणी आज भी समाज को जोड़ने की सबसे बड़ी शक्ति है।

कार्यक्रम का शुभारंभ सद्गुरु कबीर साहेब के छायाचित्र पर छत्तीसगढ़ प्रदेश मानिकपुरी पनिका समाज के प्रदेश सचिव गोरेदास, प्रदेश महासचिव नानही दास दीवान एवं प्रदेश सहसचिव सुश्री मनीषा दास द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ किया गया। इसके बाद कबीर वाणी, भजन-कीर्तन और सत्संग के माध्यम से सत्य, प्रेम, समानता, सेवा और मानवता का संदेश दिया गया।

आस्था का सबसे मनोहारी दृश्य तब देखने को मिला जब कबीर आश्रम से भव्य शोभायात्रा प्रारंभ हुई। यह यात्रा पौड़ी चौक, अटल चौक, बृहस्पति बाजार, पुराना बस स्टैंड, गांधी चौक एवं शिव मंदिर होते हुए पुनः कबीर आश्रम पहुँची। महिलाएँ, युवा, बुजुर्ग और बच्चे हाथों में श्वेत ध्वज लेकर अनुशासित रूप से चल रहे थे। आगे धुमाल की गूंज और पारंपरिक कर्मा नृत्य की प्रस्तुति ने पूरे नगर को भक्तिमय वातावरण में डुबो दिया। नगरवासियों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया। तपती धूप भी श्रद्धालुओं के उत्साह को डिगा नहीं सकी। यह केवल एक शोभायात्रा नहीं, बल्कि समाज की एकता, अनुशासन, संस्कार और आत्मगौरव की जीवंत तस्वीर थी।

कार्यक्रम में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले होनहार छात्र-छात्राओं तथा समाज सेवा में उल्लेखनीय योगदान देने वाले युवा समाजसेवियों का सम्मान किया गया। वक्ताओं ने भावुक शब्दों में कहा कि यदि आने वाली पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना है तो प्रत्येक घर में संत कबीर साहेब का छायाचित्र, उनका जीवन परिचय, कबीर वाणी की पुस्तकें और समाज की मासिक पत्रिका अवश्य होनी चाहिए। माता-पिता अपने बच्चों को केवल आधुनिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि संत कबीर के विचारों का संस्कार भी दें। जिस घर में कबीर वाणी का पाठ होगा, वहाँ प्रेम, सद्भाव, नैतिकता और मानवता का प्रकाश कभी कम नहीं होगा। हर घर कबीर हर युवा संस्कारित का संकल्प पूरे आयोजन का सबसे प्रेरक संदेश बनकर उभरा।

इस अवसर पर प्रदेश महासचिव नानही दास दीवान, प्रदेश सचिव गोरेदास, प्रदेश सहसचिव सुश्री मनीषा दास, प्रदेश उपाध्यक्ष पवनदास, महिला प्रकोष्ठ प्रदेश सचिव श्रीमती सुचित्रा मानिकपुरी, कोरबा जिलाध्यक्ष संतोष दास महंत, जिला उपाध्यक्ष मोहर दास महंत तथा जिला निर्वाचन अधिकारी मायादास की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संचालन घनश्याम दास ने किया। आयोजन को सफल बनाने में ब्लॉक अध्यक्ष कंवल दास, महिला प्रकोष्ठ की श्रीमती प्रीति महंत, युवा प्रकोष्ठ के दिनेश दास सहित राजू महंत, श्रवण दास, गणेश महंत, शंकर दीवान, कमल महंत एवं समाज के अनेक सहयोगियों ने सक्रिय भूमिका निभाई।

कार्यक्रम के अंत में सामूहिक महाप्रसाद का आयोजन हुआ। सभी समाजजनों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि संत कबीर साहेब के बताए सत्य, प्रेम, समानता, भाईचारे और मानव सेवा के मार्ग पर चलते हुए समाज को शिक्षित, संस्कारित और संगठित बनाएंगे। पाली का यह आयोजन केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं रहा, बल्कि यह आने वाली पीढ़ी के लिए संस्कार, एकता और सामाजिक चेतना का ऐसा दीप बन गया, जिसकी रोशनी लंबे समय तक समाज का मार्गदर्शन करती रहेगी।

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