
कुसमुंडा/कोरबा (आई.बी.एन -24) साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के कुसमुंडा मेगा प्रोजेक्ट में बुधवार सुबह भूविस्थापितों ने अपनी मांगों को लेकर उग्र आंदोलन छेड़ दिया। पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत सुबह 8 बजे से सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने खदान में घुसकर कोयला खनन और OB परिवहन में लगी हेवी मशीनों के पहिए थाम दिए।
लगभग 5 घंटे तक चले चक्काजाम और प्रदर्शन के बाद SECL प्रबंधन के ठोस आश्वासन पर दोपहर 1 बजे आंदोलन स्थगित कर दिया गया। प्रबंधन ने 5 दिन के भीतर बिलासपुर मुख्यालय में CMD स्तर की बैठक बुलाने और एक सप्ताह में 15 भूविस्थापितों को आउटसोर्सिंग कंपनियों में स्थायी रोजगार देने का लिखित भरोसा दिया है।
इन 4 मांगों पर था जोर
1. अर्जन के बाद जन्म का मामला: जमीन अधिग्रहण के बाद परिवार में जन्मे सदस्यों के लिए रोजगार व पुनर्वास की स्पष्ट नीति बनाई जाए।
2. लंबित प्रकरण: वर्षों से धूल खा रहे मुआवजा-नौकरी के पुराने प्रकरणों का समयबद्ध निराकरण किया जाए।
3. अवैध कब्जे पर कार्रवाई: बलरामपुर, दुरपा सहित प्रभावित गांवों में वन भूमि व अधिग्रहित क्षेत्र में हो रहे अवैध कब्जों पर FIR दर्ज हो।
4. आउटसोर्सिंग में 100% स्थानीय भागीदारी: खदान में चल रहे सभी आउटसोर्सिंग कार्यों में भूविस्थापित परिवारों के सदस्यों को प्राथमिकता दी जाए।

प्रबंधन झुका दी ये दो बड़ी गारंटी।
आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए एरिया महाप्रबंधक, कार्मिक प्रबंधक व सुरक्षा अधिकारी मौके पर पहुंचे। लंबी वार्ता के बाद प्रबंधन ने मंच से ये घोषणाएं कीं:
1. CMD स्तर की बैठक: अगले 5 कार्यदिवस में बिलासपुर मुख्यालय में CMD, निदेशक कार्मिक व भूविस्थापित प्रतिनिधिमंडल की उच्च स्तरीय बैठक होगी। इसमें ‘अर्जन के बाद जन्म’ समेत सभी नीतिगत मुद्दों का स्थायी समाधान निकाला जाएगा।
2. तत्काल रोजगार: कोयला व मिट्टी निकासी में लगी आउटसोर्सिंग कंपनियों में 15 भूविस्थापितों को एक सप्ताह के भीतर नियुक्ति पत्र जारी कर काम पर रखा जाएगा। सूची आंदोलनकारियों से ले ली गई है।
आंदोलनकारी नेता की चेतावनी
आंदोलन का नेतृत्व कर रहीं भूविस्थापित नेता गोमती केवट ने कहा, _“ये हमारे अस्तित्व और हक की लड़ाई है। प्रबंधन ने CMD स्तर की बैठक और 15 लोगों को तत्काल नौकरी का भरोसा दिया है। अगर तय समय-सीमा में वादे पूरे नहीं हुए तो अगला आंदोलन अनिश्चितकालीन होगा और पूरी खदान ठप कर दी जाएगी।”_
प्रबंधन के आश्वासन के बाद दोपहर 1 बजे प्रदर्शनकारियों ने स्वेच्छा से खदान क्षेत्र खाली कर दिया, जिसके बाद कोयला उत्पादन व डिस्पैच का काम फिर से शुरू हो सका