
जी पी एम (आई.बी.एन.-24) छत्तीसगढ़ के अमरकंटक-मैक्कल पर्वत शृंखला से एक गंभीर और भयंकर मामला सामने आया है। प्रभावशाली रूप से प्रभावशाली क्षेत्र में स्टोन क्रेशर ऑपरेशन और आधारभूत संरचनाओं के उल्लंघन पर ग्राउंड कर रहे पत्रकार सुशांत गौतम पर हमला किया गया। घटना में पत्रकार की गाड़ी का काफिला तोड़ दिया गया, उन पर आरोप लगाया गया, जबकि उनके दोस्त का मोबाइल छीनकर संपर्क में आने से तोड़फोड़ करने की कोशिश का भी आरोप है। यह मामला अब केवल पत्रकारों पर हमले तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसे खनन-क्रेशर माफिया, सिल्वेस्टर जंगलराज की मित्रता से देखा जा रहा है। घटना के बाद प्रदेशभर में गोपनीयता की स्थिति बन रही है और पत्रकार सुरक्षा एवं अवैध कार्रवाई पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
आयुर्वेद का खुला उल्लंघन
मर्घटी वनमंडल ने अनूपपुर खनिज विभाग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि पमरा क्षेत्र में तीन स्टोन क्रेशर्स द्वारा निर्मित शेयरों का उल्लंघन किया गया। साथ ही यह भी दर्ज है कि वन क्षेत्र से बेहद करीब से काम किया जा रहा है, जबकि पुराने के अनुसार क्रेशर/खनन ऑपरेशन में न्यूनतम 250 मीटर की दूरी होनी चाहिए।
रिपोर्ट के अनुसार संबंधित अधिकारियों द्वारा एसोसिएटेड रिपब्लिक ऑफ इन्वेस्टिगेशन ऑफ इन्वेस्टिगेशन एंड इंवेस्टिगेशन की मांग भी की गई है। यह पूरे अनऑर्गेल अमरकंटक-मैकल बायोस्फियर रिजर्व के शेयरों का संतुलन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
घेराबंदी के बाद ‘हाईवा ट्रैक ट्रैक’ के
पत्रकार गौतम सुशांत ने बताया कि वे 8 जनवरी 2026 को शाम करीब 6 बजे ग्राउंड शूटआउट से लौट रहे थे, तभी जीपीएम जिले के धनौली गांव के पास उनकी गाड़ी को रास्ते से घेर लिया गया।
पीड़ित के अनुसार
बगल में एक कार के आगे एक हाईवा खड़ा कर दिया गया और पीछे से एक अन्य वाहन को पूरी तरह से बंद कर दिया गया। इसके बाद गैल-मैसाइन और धमाकियों का दौर शुरू हुआ और गाड़ी के दरवाजे पर दबाव बनाया गया।
लोहे की रॉड से वार, कांचा मोबाइल छीनने का आरोप।
एक व्यक्ति ने लोहे की सड़क से ड्राइवर की साइड का कांच तोड़ दिया, जिससे कांच टूट गया। पुराने कांच के टुकड़े के टुकड़े और मोती पर लगें। उन्होंने फोटो, मेडिकल और वाहन क्षति का प्रचार-प्रसार तैयार किया है। इतना ही नहीं, घटना के दौरान उनके दोस्त रितेश गुप्ता का मोबाइल फोन बंद कर देने का भी आरोप लगाया गया है। पत्रकार का कहना है कि यह “गुस्से” में नहीं बल्कि साक्ष्य निषेध और ख़बर पर हमले का इरादा था।
माफियाओं पर कई गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज –
घटना के बाद पुलिस थाने में लिखित शिकायत दी गई, जिसके आधार पर एफआईआर दर्ज की गई। एफआईआर नंबर 0014/2026 एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की धारा 126(2), 296, 115(2), 351(3), 324(4), 304, 3(5) दर्ज हैं। यह मामला संज्ञेय अपराध के कार्यालय में आता है। FIR में शामिल
हैं जिन तीन लोगों को
शामिल
पत्रकार सुशांत गौतम ने कहा कि यह घटना केवल व्यक्ति विशेष पर हमला नहीं है, बल्कि राष्ट्रपति की स्वतंत्रता और लोकतंत्र पर हमला है। वे यह भी कहते हैं कि दबाव बनाने के लिए रॉकेट रॉकेट/केस अन्य क्षेत्र में रॉकेट जा सकते हैं, ताकि वे पीछे की ओर हट सकें। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे समझौता नहीं, न्याय चाहते हैं।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
के बाद पत्रकारों और नागरिकों में चर्चा है कि केवल एफआईआर दर्ज करना उचित नहीं है। मांग की जा रही है कि
खनिज-वन-राजस्व पर अवैध खनन/उत्खनन क्षेत्र में संचालित सभी स्टोन क्रेशरों की विशेष जांच हो, संयुक्त कार्रवाई हो
पीड़ित पत्रकारों और गवाहों को सुरक्षा दी जाए।
किस बायोस्फियर में खनन, और सवाल करने पर हमला किसका संरक्षण? अमरकंटक मैकल क्षेत्र केवल स्थानीय ज्वालामुखी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय ज्वालामुखी सुरक्षा का विषय है। यदि बायोस्फियर जैसे शिक्षण क्षेत्र में किसी पत्रकार पर ही हमलावर हमला किया जा रहा है, तो सुझाव है कि ऐसे क्षेत्र को किसका संरक्षण प्राप्त है।
खास बात यह घटना ऐसे समय में हुई है जब खुद सरकारी सहयोगी/रिपोर्ट में क्षेत्र में क्रेशर ऑपरेशन और आतंकवादी हमलों की बातें सामने आ रही हैं, जिससे मामले की नियुक्ति और वृद्धि होती है।