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बलौदा : धान उपार्जन केंद्र पहरिया में भ्रष्टाचार का खुलासा: 41 किलो 400 ग्राम की अवैध कटौती, किसानों की मेहनत की कमाई पर डाका। 

 

जांजगीर-चांपा/बलौदा (आई.बी.एन.-24) छत्तीसगढ़ शासन की धान व्यवस्था बलौदा विकासखंड अंतर्गत सेवा समिति मर्यादित पहरिया (पंजियन डिवीजन 639) के धान उपार्जन केंद्र पहरिया में पूरी तरह से दर्शता  है कि, यहां सरकारी नियम नहीं, बल्कि घटिया अधिकारियों की संस्था चल रही है, जहां किसानों की मेहनत की कमाई लूटी जा रही है।

मिली जानकारी के अनुसार इस उपार्जन केंद्र में प्रति बोरा 41 किलो 400 ग्राम का अवैध धान लिया जा रहा है, जो सीधे-सीधे शासन के स्पष्ट सत्यापन का उल्लंघन है। जो किसान तय मात्रा से कम धान का उत्पादन करता है, उसे संविधान के रूप में क्वांटम बनाने का खतरा पैदा हो जाता है। यह केवल वैश्वीकरण नहीं, बल्कि सांकेतिक आर्थिक अपराध है।

किसानों के लिए नरक बना पहारिया उपार्जन केंद्र।

धान बेचने वाले किसानों के लिए यहां न वाहन की सुविधा, न बैठने की व्यवस्था, न पानी जैसी लॉज की बिक्री होती है। फोर्थ लाइन में किसानों ने किसानों पर अत्याचार किया और किसानों ने मजदूर बना लिया। इस स्थिति का लाभ समूह भोले-भाले ग्रामीण किसानों और महिलाओं को ठगा जा रहा है।

बोरा पलटी और अवैध वसूली का खुला खेल।

ग्रामीणों ने बताया कि यहां किसान अपनी धान बोरा पलटी करवाने से हमाली के नाम पर  से उगाही करता है। हमाली के नाम पर प्रति बोरा ₹3 का अवैध रकम का मांग करता है। जो किसान पैसे देने से मना करता है, वो कहता है कि “खुद काम करो, नहीं तो धान वापस ले जाओ।”
यह प्रश्न उठना लाजिमी है कि- क्या सरकारी उपभोक्ता केंद्र अब प्रतिबंधित के बावजूद ऐसे प्रबंधक बैठाकर उसूली कर रहा है।

अलग- अलग बोरी, अलग-अलग टुकड़े – सामी का नया तरीका।

धान चोरी करने वाली कई महिलाओं और किसानों ने बताया कि तीन चोरियां अलग-अलग होकर अपने लिए ले जाती हैं। यह गेम इस साल ही नहीं, बल्कि पिछले साल भी बेरोकटोक चल रहा था, लेकिन किसी जिम्मेदार अधिकारी ने आज तक जांच करने की जहमत नहीं बताई।

खुले मैदान में सरकारी धान- नुकसान की भरपाई किसानों से।

सबसे बड़ी  बात ये है कि खरीदा हुआ धान खुली जमीन में असुरक्षित तरीके से रखा जा रहा है। पूरे जिले में बारिश,  और नुकसान का खतरा किसान बड़े पैमाने पर लेकर जा रहे हैं। यानी सरकारी व्यवस्था की नाकामी की कीमत भी किसान ही चुका रहा है।

प्रशासन की दुकान के गोदाम में.

प्रशासन का मौन बने रहना भी गंभीर  सवाल उठाती हैं। कौन से अधिकारी आया हैं या फिर जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं?
यदि यह सभी अधिकारियों की जानकारी में हो रहा है, तो यह सीधी-सीधा सुरक्षा में चल रही है।

अब विस्तार तय हो…

यह खबर शासन-प्रशासन से सीधा सवाल है…?

41 किलो 400 ग्राम का अवैध ऑर्डर किसने दिया ..?

बोरा पलटी और ₹3 प्रति बोरा वाजिब पर कार्रवाई क्यों नहीं…?

खुले मैदान में धान की जिम्मेदारी कौन…?

पिछले वर्ष की अनियमितता पर जांच क्यों नहीं हुई…?

यदि तत्काल जांच, जिम्मेदार अधिकारियों पर प्रतिबंध और आपराधिक कार्रवाई नहीं हुई, तो यह साफ हो जाएगा कि किसानों की मेहनत से कमाई करने वालों को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है।

नोट: समाचार संकलन के दौरान समीक्षा का वीडियो हमारे पास सुरक्षित है, जांच के लिए समय पर उपलब्ध है।

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