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बाल संप्रेक्षण गृह से फिर भागे 2 अपचारी बच्चे, चंद घण्टों में परिजनों के साथ वापस लौटे , कोहड़िया स्थित नए शासकीय भवन में तत्काल शिफ्ट करने की दरकार ,,क्या सुध लेगा प्रशासन ….।

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कोरबा(आई.बी.एन -24) आकांक्षी जिला कोरबा में बाल संप्रेक्षण गृह के सुरक्षित संचालन में निगम

नगर निगम प्रशासन की अनदेखी भारी पड़ रही। रविवार को विधि से संघर्षरत 2 अपचारी बच्चे स्टॉफ व सुरक्षा में तैनात नगर सैनिक को शौच के बहाने चकमा देकर
दीवार से कूदकर फरार हो गए।हालांकि परिजनों एवं पुलिस की सूझबूझ से दोनों अपचारी बच्चे पुनः वापस लौट आए । लेकिन एक माह के भीतर हुई इस तरह की दूसरी घटना ने संबंधित विभाग समेत जिला प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। रिसदी में किराए के भवन में बाल संप्रेक्षण गृह का संचालन सुरक्षा के लिहाज से महफूज नजर नहीं आ रहा। जिला प्रशासन को जल्द ही कोहड़िया में निर्मित नवनिर्मित भवन में बाल संप्रेक्षण गृह को शिफ्ट करने की दरकार है।

यहां बताना होगा कि विधि से संघर्षरत बालकों के लिए छत्तीसगढ़ शासन महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बाल संप्रेक्षण गृह का संचालन किया जाता है। विभागीय भवन के अभाव में कोरबा जिले में रिसदी में किराए के भवन में इसका संचालन किया जा रहा है।।लेकिन सुरक्षा के लिहाज से यह भवन महफूज नहीं है। यहां संचालन से लेकर अब तक 5 बार विधि से संघर्षरत अपचारी बच्चे स्टॉफ व सुरक्षाकर्मी को चकमा देकर फरार हो चुके हैं। हालांकि हर बार परिजनों से मिलकर वे लौट आते हैं या पुलिस उन्हें ढूंढ लाती है।
जिले के शासकीय बाल संप्रेक्षण गृह से रविवार सुबह 2 नाबालिग बालक फरार हो गए। कटघोरा और पाली थाना क्षेत्र में हुए अनाचार के मामले में पुलिस ने दो नाबालिक अपचारी बालक के खिलाफ कार्रवाई की थी। विधि से संघर्षरत दोनों नाबालिग बच्चे सिविल लाइन थाना अंतर्गत रिसदी चौक स्थित बाल संप्रेक्षण गृह भेजे गए थे। रोजाना की तरह रात में भोजन बाद बालगृह के दरवाजे को बंद कर दिया गया था। सुबह शौच के बहाने बाल संप्रेक्षण गृह के पीछे हिस्से में पहुंचे और शौचालय की दीवार से कूद कर फरार हो गए। घटना के कुछ ही देर पहले सुरक्षा में तैनात नगर सैनिक संतोष केवट राउंड के बाद मुख्य द्वार पर बैठा था और पीछे के रास्ते से घटना हो गई। इन दोनों के फरार होने की जानकारी तब लगी जब काफी देर तक कमरे में नहीं आए। हालांकि दोनों अपचारी बच्चे पुनः वापस लौट आए हैं। एक बच्चे को खुद परिजन लेकर आए तो दूसरा पुलिस की मदद से संप्रेक्षण गृह पहुंचा।

एप्रोच रोड बनने के पहले शिफ्ट करना जरूरी

कोरबा के रिसदी में भी बाल संप्रेक्षण गृह संचालित हैं। जहां विधि से संघर्षरत 49 अपचारी बच्चे रखे गए हैं। लेकिन किराए के भवन में संचालित यह भवन सुरक्षा के लिहाज से उपयुक्त नहीं हैं। जिला प्रशासन द्वारा करोड़ों की लागत से कोहड़िया में एकीकृत बाल विकास परिसर तैयार किया गया है। जहां बाल संप्रेक्षण गृह समेत बालक -बालिकाओं के कल्याण के लिए संचालित समस्त संस्थाएं एक ही परिसर में संचालित होंगी। लेकिन 2 साल से ये एप्रोच रोड के अभाव में सफेद हाथी बना हुआ है। हालांकि नगर निगम द्वारा एप्रोच रोड के लिए निविदा की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। गत माह भी बाल संप्रेक्षण गृह से 2 अपचारी बच्चे गार्ड की लापरवाही से मुख्य द्वार खुला रखने की वजह से भाग निकले थे। उसके बाद यह घटना घटित हुई। लिहाजा एप्रोच रोड बनने से पहले ही सड़क मार्ग की निगम को वैकल्पिक व्यवस्था कर भवन महिला बाल विकास को हैंड ओवर करने की दरकार है। ताकि बाल संप्रेक्षण गृह जल्द से जल्द कोहड़िया शिफ्ट किया जा सके। करोड़ों भवन बनाए जाने के दौरान ही एप्रोच रोड बनाया जाना था,जिसकी अनदेखी आज भारी पड़ रही।

स्टॉफ ,सुरक्षाकर्मी की भूमिका संदेहास्पद ?

पिछले एक महीने में दूसरी बार सुरक्षा व्यवस्था पर सेंध लगाकर बाल संप्रेक्षण गृह से भागने की घटना के बाद कहीं न कहीं बाल संप्रेक्षण गृह के स्टॉफ एवं सुरक्षाकर्मी की भूमिका संदेह के दायरे में है।अधिकारियों के कड़ी हिदायत के बावजूद ऐसी घटनाओं में रोकथाम नहीं लगने से इन आशंकाओं को बल मिल रहा। सुरक्षा में तैनात जवान को चकमा देकर दो बार बच्चे भाग चुके हैं। एक बार गेट खोलकर तो दूसरी बार चाबी चुराकर ।

वर्जन

लौट आए हैं बच्चे,शिफ्ट करने की दरकार

बाल संप्रेक्षण गृह से भागे दोनों बच्चे वापस आ गए हैं। एक को परिजन खुद छोंड़ने आए थे। नए भवन में संचालन की आवश्यकता है।एप्रोच रोड के अभाव में भवन हैंड ओवर नहीं लिए हैं। जिला प्रशासन को वस्तुस्थिति से अवगत कराया गया है ।

गजेंद्र देव सिंह ,जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी एवं प्रभारी अधीक्षक बाल संप्रेक्षण गृह कोरबा (छ.ग)।

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