छत्तीसगढ़

वन विभाग के दैनिक वेतन भोगी अड़े है अपने मांगो को लेकर, आज 48 वां दिन भी  लगातार हड़ताल जारी है।

रायपुर (आई.बी.एन -24)छत्तीसगढ़ में इन दिनों हड़ताल का ताता लगा है, मुख्य मंत्री, वन मंत्री ,वित्त मंत्री वन विभाग में कार्यरत दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी, दैनिक श्रमिक, वाहन चालक, कम्प्युटर आपरेटर, राज्य लघुवनोपज संघ के तेन्दुपत्ता गोदाम सुरक्षा श्रमिक, वन विकास निगम के चौकीदारों एवं रिडर, रिकार्डर के हितों में फैसला लेने में अब तक अक्षम दिखाई दे रहे है!
यही भाजपा के तमाम मंत्री जब विपक्ष में रहे तो सत्ता पाने, खुर्सी के लालच में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के मंच में आकर घोषणा किया कि भारतीय जनता पार्टी आप लोगों के मांग को घोषणा पत्र में रखेगा और भाजपा की सरकार बनते ही 100 दिनों के भीतर निर्णय लेकर. नियमित करेगा!
सरकार बनने के बाद लोक सभा चुनाव के पहले भाजपा के महामंत्री संजय श्रीवास्तव ने पत्रकार वार्ता के बहस में यह भी कहां कि हम साल भर के अंदर में नियमितीकरण करेंगें, मोदी की गारंटी पुरी करेंगें!
आज 08 माह बित गया कोई सुग बुगाहट नही है, मुख्य मंत्री साय जी खाली कमेटी का हवाला देता है क्या मुख्य मंत्री चाहेगा तो कमेटी रिपोर्ट नही सौंपेगा, एक घंटा में कमेटी का रिपोर्ट तैयार हो जायेगा लेकिन मुख्य मंत्री जी खुद चाहता है कि कांग्रेस पार्टी की तरह कमेंटी बनाकर छोड़ दो और चुप बैठ जाओ ! सभी कर्मचारी व युवा वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी पर भरोसा जताया उ, के विडीयों वक्तब्य को सुनकर लेकिन अब ओ. पी. चौधरी जी भी विफल होते हुए दिखाई दे रहे है, और गोल मोल जवाब देना चालु कर दिया है!

यही छत्तीसगढ़ दैनिक वेतन भोगी वन कर्मचारी संघ एक लौता संगठन था जो उप मुख्य मंत्री, अरूण साव जी, उप मुख्य मंत्री विजय शर्मा जी, वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी जी के भाषण सुनकर दैनिक वेतन भोगी हांथ में गंगाजल लेकर कसम खाया था कि अब भाजपा को हि जीतायेंगे और आज वही हुआ लेकिन खुर्शी की मोह ने मंत्रियों के बोल चाल, सहयोग भावना को बिल्कुल बिगाड़ दिये है, जिस चीज को बोलकर नही कर पा रहे है वो भविष्य में और क्या चीज करेगा इस चिंता में है कर्मचारी!
अभी सामने नगरी निकाय, पंचायत चुनाव है अगर मांगे पुरी नही होती है तो हो सकता है आने वाला विधान सभा, लोक सभा का स्वरूप बिगड़ सकता है जब निव ही बिगड़ जायेगा तो ईमारत येसे ही गीर जायेगा!
48 दिनों में छत्तीसगढ़ दैनिक वेतन भोगी वन कर्मचारी संघ ने 03 दैनिक वेतन भोगी खोया है जिसकी पिड़ा उन्हे धरना स्थल से उठने नही दे रहा है, इतने लंबे समय तक हड़ताल मेें बैठना ओ भी तुता जैसे धरना स्थल में लगातार 48 दिनों तक भीड़ ही भीड़, इससे स्पष्ट होता है कि वन विभाग के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों में तगड़ी एकता है और कमर कसकर मैदान में उतर चुके है और रिजल्ट लेकर ही जायेगा!
विभाग के अधिकारी यह कह रहे है कि हड़ताल खतम करों उसके बाद प्रस्ताव शासन को भेज दिया जायेगा लेकिन वन विभाग के मन में डर है कि पिछले बार की जैसा कहीं अधिकारी फिर ठग न दें! वर्ष 2022 में जब वन विभाग के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी 34 दिनों तक हड़ताल में रहें तो नियमितीकरण, कार्यभारित तथा आकस्मिकता निधि सेवा नियम गठन करने का प्रस्ताव 2023 में भेजा जबकी हड़ताल सितंबर 2022 में खतम हो चुका था वादा के अनुसार प्रस्ताव तत्काल भेजना था लेकिन प्रस्ताव को अगस्त 2023 में भेजा गया साल भर बाद, इसलिये दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों में अधिकारियों के प्रति विश्वांस टुट रहा है!
इसलिये ही दैनिक वेतन भोगी कार्यभारित तथा आकस्मिकता निधि सेवा नियम व स्थायीकरण के मांग को लेकर अड़े हुये है, शासन को भेजकर पुरा कराईये या कितने दिनो के भीतर में करेंगें ये लिखकर दिजीये करके अंड़ गये है! अधिकारी दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को अपने विश्वांस में नही ले पा रहे है!

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