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हवा निकल गई कटघोरा का बीएमओ  बचाओ अभियान…नहीं मिला अधिकारियों कर्मचारियों का समर्थन।

 

रविवार बैठक का उद्देश्य नही बताया गया था।

कटघोरा (आई.बी.एन -24) सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कटघोरा में बीएमओ बचाओ आंदोलन टाँय टाँय फिस्स हो गया।
ज्ञात हो कि डॉ रुद्रपाल सिंह कंवर कटघोरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का लम्बे समय से बीएमओ का पद सम्भाल रहे थे। दो व्यक्तियों के अकाल मृत्यु सर्पदंश से पद मुक्त कर दिया गया है। सूत्र बताते हैं कि पहले कटघोरा के विधायक बोधराम कंवर जी फिर इनके पुत्र के नाम से कर्मचारियों से काम करवाते थे अब चूंकि सरकार बदल गया है तो अपने ससुर भाजपा नेता का रुदबा से रुदपाल सिंह ने अपना पैतरा फिट करने के लिए बहुत प्रयासरत थे लेकिन सफलता हासिल नही हुआ।4 सूत्रीय आंदोलन के लिए 1. काली पट्टी लगाकर
2.एक दिवसीय अवकाश 3. जिला मुख्यालय कोरबा में सामुहिक धरना 4 अनिश्चित कालीन हड़ताल
उपरोक्त 4 सूत्रीय आंदोलन पर कोई आंदोलन नही हुआ बल्कि दो चार लोग गम्मत में जोकर निकलते हैं वैसे ही काली पट्टी मारकर दिखे लेकिन बाद में कहा विलुप्त हुए लोकतंत्र के चौथा स्तंभ ढूंढते रह गए।अस्पताल के दीवारों पर जगह जगह रुदपाल सिंह के फोटो के साथ फ्लेक्स छपवा कर चिपकवाया गया था।जितना कि कभी इनके बीएमओ रहते मलेरिया उन्मूलन, कुष्ठ रोग, प्लस पोलियो अभियान में नही लगाया गया था।
इन आंदोलन का खेल बी पी एम सितेश पाण्डेय ने खेला था पर्दे के पीछे रहकर जो कि बतौर संविदा कर्मचारी के पद पर कार्यरत हैं इसका ट्रांसफर अन्यत्र हो चुका है लेकिन जुहुजूरी करके नाग की तरह कुंडली मारकर बैठा हुआ है इसका महत्वपूर्ण कारण है कोरोना के समय बहुत ज्यादा राशि आया है जिसका वारा न्यारा इन्ही के कर कमलों से हुआ है।इनके द्वारा बहुत खूबसूरती तरीका से बड़े बाबू पैकरा जी डिमोशन कर मन्नुपाल कंवर को महत्वपूर्ण भूमिका दिया गया।
आंदोलन का आवेदन देने के बारी जब भी आता था तब तब बीपीएम सितेश पाण्डेय कलेक्टरेड
जाते थे तब तब कोई न कोई बहाना बनाकर भाग जाता था। ताकि मेरा चेहरा सामने न आए। एक गिरोह बनाकर कुछ एम पी डब्लू कुछ सुपरवाइजर मिल कर जो काम करते उनको आर्थिक मासिक रूप से प्रताड़ित करते थे।इनके आंदोलन को अंदरूनी तौर पर कोई समर्थन नहीं था।सिर्फ दिखावा था।ताकि रुदपाल सिंह के सामने हीरो बन सके।पूर्व बीएमओ रुद्रपाल सिंह भी इनके धोखेबाजी से अनजान थे और कर्मचारियों को भी रविवार को बैठक में धोखे से बुलाया गया था।सबको डॉ रुद्रपाल से अपना स्वार्थ सिद्ध करना था। डॉ साहब को यह मालूम नहीं था कि इनके अपने ही गर्त पर गिरा देंगे।
सरकारी भवन में दो एसी लगाया है इनका परिवार बिलासपुर में रहता है। बिजली बिल अस्पताल प्रबंधन देता है।शासकीय राशि का दुरूपयोग किया गया जा रहा है।इस पर कार्यवाही होनी चाहिए।जिसका जाँच होना अतिआवश्यक है।
एक जो इशारा अब तक इधर था वही नजराना इधर किस लिए है। चूंकि अब नया बीएमओ कटघोरा में बैठ चुकी है जो आंदोलनकारी थे वही अब नई बीएमओ का गुणगान शुरू कर दिए हैं।कुल मिलाकर एक बात समझ में आया जो रविवार को आंदोलन का रूप रेखा तैयार किया गया था वह निजी स्वार्थ के लिए किया गया था।सुंदर पटेल वह अपना मेडिकल और निजी प्रेक्टिस के वजह से रुद्रपाल का गुणगान किया तथा कोरबा कलेक्टर साहब के पत्नी के विषय पर अपशब्दों प्रयोग किया था जो एम पी डब्लू सुंदर पटेल का छिछोडेपन को प्रदर्शित करता है।सुनील शर्मा जिसका काम पर कम ध्यान चुगलघोरी और चमचागिरी को विशेष महत्व देता है।पाली विकास खण्ड के चैतमा क्षेत्र के एम पी डब्ल्यू हरि दिवाकर अपना प्राइवेट हॉस्पिटल के लिए चिंता था इसलिए पाली बीएमओ को हटाने के लिए कोई आंदोलन नहीं किया वफादार होना था तो पाली बी एम ओ के लिए होना था।सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बी एम ओ रुद्रपाल सिंह कँवर का ट्रांसफर होना था लेकिन दीपका में पदस्थ हरि कँवर का गलती से हो गया सरनेम से फँसा पेंच वरना इनको अन्यत्र जाना नहीं पड़ता।मन्नू बाबू बहुत पैतरेबाजी का खेल खेला लेकिन इसका खेला बिगड़ गया क्योंकि आंदोलन फैल हो गया तब इनका वसूली अभियान थम गया। भ्रष्टाचार का खेल फिर हाल नया बीएमओ के आने से थम गया है।
अंतिम बात छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य फेडरेशन के जिला संयोजक के लेटर पैड से पत्र जारी किया गया था उसके हस्ताक्षर में अंतर है।इन लोंगो ने आनन फानन में आंदोलन को वापस लेना पड़ा क्योंकि आंदोलनकारी व्यक्तियों को यह भलीभांति मालूम था आंदोलन सफल नहीं होगा तथा इनके आंदोलन को देखकर शहर के लोग भी आंदोलन करने के लिए एक्टिव थे।

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