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न्यू कोरबा हॉस्पिटल में लापरवाही पूर्वक इलाज व पैसों की उगाही किए जाने पर शिकायत,निमोनिया ग्रसित मरीज को बताया किडनी खराब…देखे पूरी खबर।

संवाददाता : साबीर अंसारी की रिपोर्ट।

कोरबा(आई.बी.एन 24) कोरबा जिले के बड़े अस्पतालों में शुमार किए जाने वाला अस्पताल है NKH न्यू कोरबा हॉस्पिटल जहां दूर दूर से लोग ये उम्मीद लेकर आते है कि इस अस्पताल में आने के बाद हमे अच्छा इलाज मिलेगा पर पिछले कुछ समय से अस्पताल में आने वाले मरीज व उनके परिवार का यही कहना होता है कि यहां आने के बाद हॉस्पिटल की हकीकत पता चलती है,,, की यहां इलाज के नाम पर सिर्फ पैसों की लूट की जा रही है,,, पहले तो परिवार वालों को डराया जाता है उसके बाद हर दो घंटे में दवाइयों को पर्ची दिया जाता है जो हजारों के दामों में होता है,,,, और इस तरह लाखों की वसूली की जाती है,, ।

क्षेत्र बाँकी मोगरा में निवास करने वाले अधिवक्ता प्रमोद सोनी अपनी माताजी के स्वास लेने में परेशानी आने पर दिनांक 31/12/24 को secl बाकी अस्पताल में भर्ती कराए जहां से कुछ देर के बाद उन्हें न्यू कोरबा ले जाने की सलाह दी गई जिसके बाद लगभग दोपहर 04:00 बजे न्यू कोरबा हॉस्पिटल में पहुंच भरती कर दिया गया उस समय भी माताजी को स्वास में परेशानी हो रही थी,,, जिसके बाद आपातकालीन चिकित्सकों ने मरीज को ICU में लेजाकर ऑक्सीजन देना शुरू किया फिर कुछ समय बाद डॉक्टर अविनाश तिवारी व उनके सहयोगी डॉक्टरों के द्वारा बताया गया कि मरीज की स्थिति गंभीर है, हार्ट सही तरीके से नहीं चल रहा है और एक किडनी पूरी तरह खराब और दूसरी किडनी आधी खराब होना बताया,,,जबकि मेरे द्वारा जानकारी दिया गया कि मरीज को कभी भी किडनी संबंधी परेशानी नहीं हुई है,,, उसके बाद भी हमारी बातों को नजर अंदाज करते हुए मरीज को डायलिसिस करने और वेंटिलेटर में रखने की बात कही है,,, इस दौरान मुझे कैश काउंटर पर पैसा जमा करवाया गया और कई बार दवाइयां लाने की पर्ची दी गई जो मेरे द्वारा उन्हें बार बार दवाइयां लाकर दिया जाता रहा।

शक तो तब हु जब दवाइयां मांगने के बाद दावा ICU ले जाने के बजाए ले हुई सारी दवाइयां इमरजेंसी केबिन में पहुंचाया जा रहा था, दावा मरीज तक पहुंच ही नहीब्राही थी,,, जिसके बाद हमे और डराया गया कि मरीज की स्थिति बहुत गंभीर है,, जिसके बाद हमारे द्वारा मरीज को डिस्चार्ज कर कही और ले जाने की बात कही गई जिसे सुनते ही चिकित्सक बौखला गए और हमे जान का खतरा बताकर डराया जाने लगा,,, पर हमारे द्वारा हमारा फैसला न बदलता देख कुछ दस्तावेज बना कर हमारेंदास्तखत लिए गए और बचत राशि जमा करवाई गई,, जो कुल रकम 63000/– रुपए लिए गए,, और जब हम ICU में मरीज के पास गए तो देखे कि मरीज को बिना जरूरत आनन फानन में कई इंजेक्शन दिए जानरहे है, जिससे मरीज की तकलीफ बढ़ती नजर आई, जिसके बाद बिना देर किए एम्बुलेंस के माध्यम से दिनांक 01/01/25 को हम मरीज को अपोलो अस्पताल बिलासपुर लेजा कर भारती किया,,, जहां मरीज को निमोनिया बीमारी से ग्रसित होना पुष्टि किया गया और 08 दिनों के बाद दिनांक 09/01/25 को स्वस्थ हालत में डिस्चार्ज कर दिया गया।

अधिवक्ता प्रमोद सोनी द्वारा उक्त सारे घटना को अवगत कराते हुए केंद्रीय स्वास्थ मंत्री भारत सरकार नई दिल्ली, स्वास्थ मंत्री छत्तीसगढ़ शासन, जिला कोरबा कलेक्टर महोदय, जिला कोरबा चिकित्सा अधिकारी, जिला कोरबा थाना रामपुर को न्यू कोरबा हॉस्पिटल के प्रबंध चिकित्सक संचालक एस चांदनी, अविनाश तिवारी व अन्य चिकित्सकों के द्वारा लापरवाही करने और गुमराह करने और सोची समझी साजिश कर डरा कर पैसे वसूलने के लिए जांच कर उचित कार्यवाही करने की शिकायत दर्ज करने की गुहार लगाई,।

ऐसे ही पिछले कुछ दिनों पहले ही न्यू कोरबा हॉस्पिटल की एक घटना सामने आई थी जिसमें मरीज की जान चली गई थी, पर परिजन से पैसे उगाही करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी जिसके बाद उनके परिजनों द्वारा गुस्से में आकर हॉस्पिटल में तोड़ फोड़ भी की गई थी,, जिसकी वीडियो वायरल भी हुई थी,,,l

एक घटना और इसी तरह अभी बीते कुछ दिनों पहले ही हुई, बाकी मोगरा में ही निवास करने वाले एक मरीज को न्यू कोरबा हॉस्पिटल ले जाया गया, जिनको हार्ट में परेशानी थी जिस मरीज को आईसीयू में रख वेंटिलेटर में रख दिया गया, और हर घंटे तीन से सात हजार के बीच दवा मंगाया जाता रहा, जो दवा इमरजेंसी केबिन में जाता था पर वह से आईसीयू मरीज तक नहीं पहुंचाया जाता था, फिर कैश काउंटर पर हर दो घंटे में पैसे जमा करवाया जाता रहा परिजन द्वारा पैसे देने में कुछ देर हुआ तो उनको ये कहा गया कि पैसे नहीं है तो यहां क्यों आए हो, अभी तक के पैसे जमा करो और अपने मरीज को के जाओ यह से,,, जिसके बाद दूसरे दिन परिजन द्वारा मरीज को वहां से डिस्चार्ज करा कर रायपुर अस्पताल ले जाया गया,,,

शिकायत करता प्रमोद सोनी द्वारा बताया गया कि न्यू कोरबा अस्पताल के द्वारा छोटी सामान्य बीमारी को बड़ा बीमारी का लक्षण बता परिजन से पैसे वसूल कर गरीबों का शोषण किया जाता है, जो केवल मरीजों के इलाज करने के दिखावा के आड़ में लूट करने जैसा है,,, इस तरह के माहौल बनाकर चिकित्सक और सारे अस्पताल संचालक केवल अपनी पॉकेट गर्म करने के लिए गरीबों और मरीजों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे है। ऐसे संचालक और चिकित्सकों के वजह से क्षेत्रों में सारे स्वास्थ विभाग बदनाम होते है और ऐसे क्रिया के वजह से अस्पतालों से भरोसा जाता रहता है, इन पर जांच कर उचित कार्यवाही की जरूरत आवश्यक है।

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