पाली महोत्सव में अव्यवस्थाओं का बोलबाला, लापरवाह जिम्मेदार कर्मचारी पर कार्रवाई की मांग तेज।

🔴पाली महोत्सव बना जयंती का प्रतीक! जिम्मेदारों पर कब गिरेगी गाज…?
कोरबा(आई.बी.एन.-24) न्यूज एजेंसी। कोरबा जिले में आयोजित प्ले फेस्टिवल में अब सांस्कृतिक गौरव से बहुसंख्यक विविधताओं के कारण पर चर्चा की गई है। जिस कार्यक्रम को प्रदेश की प्रतिष्ठा से जोड़ा गया था, उसी कार्यक्रम में उद्यमों की हिस्सेदारी पर नजर आई।
फ़्लोरिडा के अनुसार, थीम स्थल पर लगाए गए चलित शौचालयों की छतें टूटी हुई दीवारें और उनमें शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री के पोस्टर-प्लेक्स का उपयोग किया गया था। यह दृश्य न केवल एनिमेटेड वाला है, बल्कि सरकारी गरिमा और सार्वजनिक प्रतिबंध पर सीधा सवाल खड़ा करता है।
करोड़ों रुपये के बजट वाले इस भव्य आयोजन में यदिस्ट रसेल की ऐसी स्थिति रही, तो स्पष्ट संकेत है कि संबंधित अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी को नामांकित से नहीं लिया। जनता के टैक्स के पैसे से होने वाले कार्यक्रम में इस प्रकार की कक्षाएं शासन-प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाती है।

” यह केवल स्थैतिक नहीं, स्थैतिक से भागना है” -राजेश यादव
प्रदेश सह महासचिव राजेश यादव ने अंतरिम प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह मामला सामान्य नहीं है, बल्कि यह प्रयोगशाला असंवेदनशीलता और कुप्रबंधन का उदाहरण है। उन्होंने पूरे प्रकरण में उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की उद्योग जगत से प्रदेश की छवि धूमिल हुई है, उनके खिलाफ कठोर और अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो लोकतांत्रिक तरीकों से आंदोलन करने के लिए लोकतंत्र को शामिल किया जाना चाहिए।
❗ प्रश्न कई, उत्तर कौन पूछेगा?
किस समारोह से पहले स्मारक का निरीक्षण हुआ था?
बजट खर्च होने के बाद भी फार्मासिस्ट की सलाह क्यों चरमरायें?
क्या जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करेंगे या ठंडे बस्ते में चले जायेंगे?
पाली महोत्सव जैसे आयोजनों का उद्देश्य संस्कृति और विकास का संदेश देना होता है, लेकिन जयंती ने पूरे आयोजन की गरिमा पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब परस्पर विरोधी प्रदेश सरकार और प्रशासन पर टिकी हैं कि वे इस मामले में कितने चुने हुए दिखाए गए हैं।
—राजेश यादव
प्रदेश सह सचिव ✍🏻