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बदलता बस्तर: बंदूक छोड़ कलम थामी, बच्चों की आंखों में अब खुशी के आंसू।

बदलता बस्तर: भय से आज़ादी, अब बच्चों के हाथों में कलम और सपनों का उजाला।

 

जगदलपुर/कोरबा (आई.बी.एन-24) बस्तर अब बदल रहा है। कभी भय और अनिश्चितता के साए में जीने वाला यह क्षेत्र आज नई उम्मीदों और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। यहां के नागरिक अब डर से मुक्त होकर खुली और सम्मानजनक जिंदगी जी रहे हैं, मानो उन्हें सच्चे मायनों में अब आज़ादी मिली हो।

बीते समय में जहां बच्चों का भविष्य अंधकारमय दिखाई देता था और कई युवा हथियारों के रास्ते पर जाने को मजबूर थे, वहीं अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। आज बस्तर के भोले-भाले आदिवासी बच्चे शिक्षा की ओर अग्रसर हैं। उनके हाथों में अब बंदूक नहीं, बल्कि कलम है, जिससे वे अपना सुनहरा भविष्य लिखने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। बेहतर शिक्षा और सुरक्षित माहौल ने उनके जीवन में नई रोशनी भर दी है।

आत्मसमर्पण कर चुके पूर्व नक्सलियों का भी कहना है कि पहले उनका जीवन किसी नरक से कम नहीं था। हर पल मौत का डर और बच्चों के भविष्य की चिंता उन्हें सताती रहती थी। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। वे न केवल भयमुक्त जीवन जी रहे हैं, बल्कि अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाकर उन्हें एक बेहतर इंसान बनाने का सपना भी साकार कर रहे हैं।

आज बस्तर के बच्चों की आंखों में आंसू जरूर हैं, लेकिन ये आंसू गम के नहीं, बल्कि खुशी और उम्मीद के हैं। यह परिवर्तन न केवल बस्तर के लिए, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है। आने वाले समय में यही बच्चे अपनी प्रतिभा और शिक्षा के दम पर बस्तर और प्रदेश का नाम देश-दुनिया में ऊंचा करें।

आशा ठाकुर
विशेष संवाददाता, आई.बी.एन-24 

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