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शिक्षा विभाग का बड़ा एक्शन: 8 प्रधानपाठक बर्खास्त, फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे लंबे समय से कर रहे थे नौकरी।

धमतरी (आई.बी.एन.-24) फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पिछले 19 साल से आठ प्रधानपाठकों को नौकरी कर रहे जिला शिक्षा विभाग धमतरी ने पैड से खाली कर एक बड़ी कार्रवाई की है, इसे शिक्षा विभाग में भर्ती कराया गया है। अधिकांश शिक्षक मैग्लोड ब्लॉक वर्ष 2007 से कई फर्जी प्रमाण पत्र स्नातकों के लिए नौकरी पर रखा गया था। जिला शिक्षा अधिकारी अभय कुमार ने जिले के आठ प्रधानपाठकों और संकायों से मिली जानकारी के आधार पर जो नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। ये सभी शिक्षक इंजीनियर इंजीनियर के नाम पर नौकरी कर रहे थे। वर्ष 2007 में शिक्षाकर्मी भर्ती के तहत ये सभी नौकरी पर लगे थे। फर्जी लापरवाही से लगे इन स्नातक स्तर की पढ़ाई के लिए आवेदन की याचिका शासन स्तर पर जारी की गई थी। जांच चल रही थी। सूचना के अधिकार के तहत कुछ शैक्षणिक संस्थानों और अन्य दस्तावेजों को सार्वजनिक किया गया है, इसलिए इसकी भी जांच की जानी चाहिए। जिसमें भारी गड़बड़ी मिली है। डिविजन जांच में प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज फर्जी मिले हैं। शासन के ऑर्डर इन सप्लाई को सीधे पद से हटा दिया गया है। इन प्लांट में ग़लती से नौकरी पाई थी। ये सभी शिक्षक वर्ष 2018 में संविलियन का भी लाभ प्राप्त कर लिया था। ट्रैक्टर्स प्रॉडक्ट प्रधानपाठक भी बन गए थे।

इन प्रधानपाठकों को डिब्बा बंद कर दिया गया है।

फ़ारिजा प्राइमरी शाला विश्रामपुर धमतरी के लखनलाल साहूकार को बर्खास्त कर दिया गया है। याचिका के बाद इसे पूर्व से निलंबित कर दिया गया था। अन्य फ़ारिगर प्राथमिक शाला सोनारिनदैहान मगरलोड के ईश्वरी निर्मलकर, पुस्तकालय प्राथमिक शाला भाठापारा दुधवारा के युकेश, तीक्ष्ण प्राथमिक शाला खिसोरा की सीता भंडारी, प्राथमिक शाला करेली शाला पारा शाला भरदा के दिव्य कुमार भंडारी, शेष प्राथमिक शाला पारा शाला भरदा के सिहावा-नगरी के जया सोनवानी, जो कि वर्तमान में शालापारा शालापारा शालापारा के भगवती खूंटेर हैं। अमेरीका में प्राथमिक शाला छत्री बाहरा नगरी के हरिशंकर साहू शामिल हैं। जिन प्रधानपाठकों पर एक्शन हुआ है, वे सबसे ज्यादा मैगलोड ब्लॉक के हैं। शिक्षा विभाग का कहना है कि यह प्रथम चरण की कार्रवाई है। कुछ अन्य उपग्रहों के खिलाफ भी जांच जारी है, शीघ्र ही कार्रवाई की जाएगी। उल्लेखनीय है कि धमतरी और मैग्लोड ने शिक्षक भर्ती में फर्जीवाड़ा किया है, अभी भी बड़ी संख्या में शिक्षक नौकरियां कर रहे हैं, इनके खिलाफ भी जांच हो सकती है।

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