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शिक्षा के मंदिर में शर्मसार करने वाली जंग: पाली हायर सेकेंडरी स्कूल में प्राचार्य-व्याख्याता भिड़े, छात्रों के सामने मारपीट।

कोरबा/पाली (आई.बी.एन -24)। नए शिक्षा सत्र के पहले ही दिन शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पाली में गुरु-शिष्य परंपरा को कलंकित करने वाली घटना सामने आई। स्कूल खुलते ही प्राचार्य मनोज सराफ और फिजिक्स व्याख्याता प्रखर पांडेय के बीच विवाद इस कदर बढ़ा कि हाथापाई की नौबत आ गई। चिंता की बात यह रही कि घटना के वक्त कक्षाओं में दर्जनों छात्र-छात्राएं मौजूद थे, जो अपने शिक्षकों को लड़ते देख स्तब्ध रह गए।

फर्जी संधारण के दबाव से भड़का महीनों पुराना विवाद।
सूत्रों के अनुसार प्राचार्य मनोज सराफ और व्याख्याता प्रखर पांडेय के बीच तनातनी पिछले कई महीनों से चल रही थी। विवाद की जड़ विज्ञान, रसायन और भौतिकी की प्रायोगिक सामग्री से जुड़े फिजिक्स रजिस्टर में कथित फर्जी संधारण का दबाव बताया जा रहा है। व्याख्याता पांडेय का आरोप है कि प्राचार्य द्वारा रजिस्टर में गलत एंट्री करने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। इंकार करने पर दोनों के संबंध बिगड़ते चले गए।

ग्रीष्मकालीन अवकाश में मामला शांत रहा, लेकिन शिक्षा सत्र के पहले दिन जैसे ही दोनों का आमना-सामना हुआ, विवाद विस्फोटक रूप ले बैठा।

छात्रों के सामने हुई धक्का-मुक्की
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पहले तीखी नोकझोंक हुई, फिर बात गाली-गलौज और धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। स्थिति हाथापाई तक पहुंचती, इससे पहले अन्य शिक्षकों ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया। स्कूल में मौजूद छात्र इस पूरे घटनाक्रम के गवाह बने।

एसडीएम के निर्देश पर हुई जांच।
घटना की सूचना मिलते ही एसडीएम पाली ने तत्काल संज्ञान लिया। उनके निर्देश पर नायब तहसीलदार जांच के लिए स्कूल पहुंचे। नायब तहसीलदार ने प्राचार्य मनोज सराफ, व्याख्याता प्रखर पांडेय समेत सभी उपस्थित शिक्षक-कर्मचारियों के बयान दर्ज किए। तैयार जांच प्रतिवेदन कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को भेजा जाएगा, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

विभाग की लापरवाही आई सामने।
सूत्र बताते हैं कि प्रायोगिक सामग्री खरीदी में गड़बड़ी और फिजिक्स रजिस्टर में फर्जी संधारण का यह विवाद महीनों पहले डीईओ कार्यालय तक पहुंच चुका था। इसके बावजूद शिक्षा विभाग ने समय रहते गंभीरता नहीं दिखाई। नतीजा यह हुआ कि आज स्कूल के भीतर गुरुओं की जंग हुई, जिसका छात्रों के मनोविज्ञान पर बुरा असर पड़ा है।

शिक्षा जगत में आक्रोश।
शिक्षा के मंदिर में जब गुरु ही मर्यादा तोड़ेंगे तो छात्रों को नैतिकता का पाठ कौन पढ़ाएगा, यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। अभिभावकों और शिक्षा प्रेमियों ने इस घटना पर कड़ी नाराजगी जताई है और दोषियों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।


 

 

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