
शहीद वीर नारायण चौक पर तीन रंबल स्ट्रिप से आमजन परेशान, रात 8:30 बजे बिना नंबर प्लेट वाहन से काम कराने का आरोप; पूछताछ के दौरान मोबाइल लूटने और बदसलूकी का भी आरोप
कोरबा (आई.बी.एन -24)
शहर के शहीद वीर नारायण चौक पर यातायात की गति नियंत्रित करने के नाम पर बनाए गए तीन रंबल स्ट्रिप अब आमजन के लिए परेशानी का कारण बनते जा रहे हैं। स्कूल, अस्पताल और प्रमुख मार्ग के बीच एक के बाद एक तीन रंबल स्ट्रिप बनाए जाने से स्कूली बच्चों, मरीजों, एम्बुलेंस, बुजुर्गों एवं गर्भवती महिलाओं को आवागमन में परेशानी हो रही है। कई दोपहिया वाहन चालक असंतुलित होकर गिरने की शिकायत भी सामने आ रही है।
नगरवासियों की परेशानी को देखते हुए पहले ही तीन में से केवल एक रंबल स्ट्रिप रखने तथा शेष दो हटाने की मांग उठाई जा चुकी है। इसके बावजूद 18 अगस्त की रात करीब 8:30 बजे उसी स्थान पर रंबल स्ट्रिप से संबंधित काम कराए जाने का मामला सामने आया है।
रात में बिना नंबर प्लेट वाहन से काम, नगर पालिका की भूमिका पर सवाल
भारतीय जनता पार्टी झुग्गी-झोपड़ी प्रकोष्ठ के प्रदेश सह संयोजक राजेश यादव ने बताया कि 18 अगस्त 2026 की रात करीब 8:30 बजे शहीद वीर नारायण चौक पर नगर पालिका परिषद के कर्मचारियों को बिना नंबर प्लेट की ‘नगर पालिका’ लिखी गाड़ी से रंबल स्ट्रिप से संबंधित कार्य करते देखा गया। घटना की तस्वीर भी उनके द्वारा ली गई है।
राजेश यादव ने जब मौके पर मौजूद कर्मचारियों से पूछा कि यह कार्य किसके निर्देश पर किया जा रहा है, तो कर्मचारियों द्वारा पहले “सीएमओ साहब ने बोला है” कहा गया। इसके बाद मुख्य कार्यपालन अधिकारी मुद्रीका प्रसाद तिवारी से बात करने पर उन्होंने कथित रूप से कहा कि “न हम लगवा रहे हैं, न हटवा रहे हैं।” इसके बाद SDO का नाम सामने आने की बात कही गई।
लोक निर्माण विभाग का काम नगर पालिका क्यों कर रही थी?
राजेश यादव ने कहा कि यदि यह कार्य लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत आता है तो नगर पालिका के कर्मचारियों द्वारा रात में यह काम किस आदेश के तहत कराया जा रहा था, यह गंभीर जांच का विषय है।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि—
पहला सवाल: यदि रंबल स्ट्रिप पहले लगाया गया था तो उसे हटाया क्यों गया और हटाने के बाद दोबारा लगाने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
दूसरा सवाल: यदि यह लोक निर्माण विभाग का कार्य है तो नगर पालिका के कर्मचारी किस अधिकार और आदेश के तहत यह काम कर रहे थे? क्या कार्य के लिए विधिवत टेंडर हुआ है अथवा विभागीय स्तर पर कार्य कराया जा रहा है?
तीसरा और सबसे गंभीर सवाल: रात के समय बिना नंबर प्लेट वाले वाहन से काम कराने की आवश्यकता क्यों पड़ी और इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों द्वारा सार्वजनिक रूप से क्यों नहीं दी गई?
बदसलूकी और मोबाइल लूटने का गंभीर आरोप
राजेश यादव ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने मौके पर चल रहे कार्य के संबंध में सवाल किया और तस्वीर लेने का प्रयास किया, तब वहां मौजूद नगर पालिका कर्मचारियों द्वारा उनके साथ बदसलूकी की गई तथा उनका मोबाइल कथित रूप से छीन लिया गया।
उन्होंने कहा कि यदि कर्मचारियों ने कोई गलत कार्य नहीं किया था तो फोटो लेने पर आपत्ति क्यों की गई और मोबाइल छीनने की नौबत क्यों आई? मोबाइल छीने जाने की घटना की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
राजेश यादव ने कहा कि वे किसी अधिकारी या कर्मचारी पर बिना जांच के दोषारोपण नहीं कर रहे हैं, लेकिन रात में किए गए कार्य, वाहन पर नंबर प्लेट का न होना, विभागीय अधिकारिता और मोबाइल छीने जाने जैसे सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच बेहद आवश्यक है।
मंत्री अरुण साव के विधानसभा चुनाव में प्रभारी रहे हैं राजेश यादव
गौरतलब है कि राजेश यादव नगरीय निकाय मंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री आदरणीय अरुण साव जी के विधानसभा चुनाव में प्रभारी की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी अधिकारी या कर्मचारी को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाना नहीं, बल्कि जनहित में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
उच्च स्तरीय जांच और दो रंबल स्ट्रिप हटाने की मांग
राजेश यादव ने जिला प्रशासन एवं संबंधित विभाग से मांग की है कि—
1. 18 अगस्त की रात किए गए रंबल स्ट्रिप के कार्य की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
2. नगर पालिका कर्मचारियों को उक्त कार्य में लगाए जाने के आदेश एवं अनुमति की जांच की जाए।
3. बिना नंबर प्लेट वाले नगर पालिका वाहन के उपयोग की जांच कराई जाए।
4. मोबाइल छीने जाने एवं बदसलूकी के आरोप की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
5. शहीद वीर नारायण चौक पर बने तीन रंबल स्ट्रिप में से दो को हटाकर केवल आवश्यक एक रंबल स्ट्रिप रखा जाए।
6. रंबल स्ट्रिप हटाने के बाद सड़क की आवश्यक मरम्मत एवं समतलीकरण कराया जाए, ताकि स्कूली बच्चों, मरीजों, एम्बुलेंस और आम नागरिकों को राहत मिल सके।
राजेश यादव ने स्पष्ट कहा कि जनता की सुविधा से बड़ा कोई विभागीय निर्णय नहीं हो सकता। यदि यातायात नियंत्रण के नाम पर ऐसा निर्माण किया जा रहा है जिससे अस्पताल जाने वाले मरीज, एम्बुलेंस और स्कूली बच्चे परेशान हों, तो प्रशासन को तत्काल पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होने तक वे इस मुद्दे को जनहित में मजबूती से उठाते रहेंगे।
संलग्न: घटना स्थल की फोटो — दिनांक 18.08.2026, समय लगभग 20:38 बजे।