छत्तीसगढ़

आदिवासी विकास विभाग में तबादला आदेश बना मजाक , डीएमएफ का मोह,प्रभाव का जोर से नियम कमजोर , दंतेवाड़ा ,बीजापुर जिले के सहायक आयुक्त डेढ़ माह बाद भी नहीं हुए भारमुक्त ,देखें स्थानांतरण आदेश …

दंतेवाड़ा(आई.बी.एन-24) विधानसभा चुनाव के लिए आदर्श आचार संहिता लागू होने में 48 घण्टे से भी कम बचा है लेकिन इसे दुर्भाग्य ही कहें कि शासन स्तर पर जारी स्थानांतरण आदेश के बावजूद संबंधित अधिकारी भारमुक्त नहीं हो रहे । आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग में यह हैरान करने वाला मामला सुर्खियों में बना है। 14 अगस्त को जारी स्थानांतरण आदेश में परियोजना प्रशासक एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना एवं प्रभारी सहायक आयुक्त दंतेवाड़ा के पद पर पदस्थ उपायुक्त आनंद जी सिंह सुकमा जिले के लिए आज पर्यन्त भारमुक्त नहीं हुए। वहीं परियोजना प्रशासक एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना एवं प्रभारी सहायक आयुक्त दंतेवाड़ा के पद पर पदस्थ उपायुक्त के .एस मसराम दंतेवाड़ा जिले के लिए भारमुक्त नहीं हुए। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार जिला खनिज संस्थान न्यास के

(डीएमएफटी ) के मद के शिखर वाले दंतेवाड़ा जिले से मोह नहीं छोंड़ पा रहे उपायुक्त आनंद जी सिंह उच्च स्तर पर जुगाड़ लगाकर भारमुक्त नहीं हुए। जिससे आने वाले दिनों में वे न केवल निर्वाचन आयोग सहित कई जांच एजेंसियों के रडार पर होंगे।

गौरतलब हो कि आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के उपसचिव एमरेसिया खेस्स ने 14 अगस्त को 3 उपायुक्त एवं 2 अनुसंधान अधिकारियों का नवीन पदस्थापना आदेश जारी किया था। इनमें दंतेवाड़ा जिले में परियोजना प्रशासक एवं सहायक आयुक्त के पद पर पदस्थ उपायुक्त आनंद जी सिंह का सुकमा जिला एवं बीजापुर जिले में
परियोजना प्रशासक एवं सहायक आयुक्त के पद पर पदस्थ उपायुक्त के.एस. मसराम का परियोजना प्रशासक एवं प्रभारी सहायक आयुक्त दंतेवाड़ा के पद पर पदस्थ किए गए थे। इनके अलावा उपायुक्त जी आर शोरी का सुकमा से कोंडागांव एवं अनुसंधान अधिकारी पी सी लहरे का कार्यालय संचालक आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान ,नवा रायपुर से प्रभारी सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग जशपुर के पद पर हुआ था । प्रभारी सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग खैरागढ़ -छुईखदान -गंडई जिले में पदस्थ अनुसंधान अधिकारी आर.एस. टण्डन प्रभारी सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग बेमेतरा में पदस्थ किए गए थे।लेकिन इनमें से उपायुक्त आनंद जी सिंह एवं के. एस .मसराम नवीन कार्यस्थल के लिए भारमुक्त नहीं हुए। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार डीएमएफ के सर्वाधिक फंड वाले दंतेवाड़ा जिले से नहीं जाने के मोह में उपायुक्त आनंद जी सिंह उच्च अधिकारियों की मेहरबानी से आज पर्यन्त भारमुक्त नहीं हुए।

पिछले दो वित्तीय वर्षों में स्वीकृत 16 करोड़ रुपए से अधिक के कार्यों में नियमों की अनदेखी! मुख्य सचिव से जांच की मांग

आदिवासी बाहुल्य आकांक्षी जिलों में शामिल कार्यालय सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग
जिला दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा में जिला खनिज संस्थान न्यास के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2021 -22 एवं 2022 -23 में स्वीकृत 16 करोड़ रुपए से अधिक के आबंटन में
नियमों से परे जाकर संचालित विभागीय आश्रम -छात्रावासों में विभिन्न सामग्रियों की खरीदी कर आपूर्ति की गई है। जिसमें रीडिंग टेबल ,चेयर एवं एंगल आयरन ,तखत,फोम गद्दा ,मच्छरदानी,सेनेटरी नैपकीन वेंडिंग मशीन ,भस्मक मशीन ,(इन्सीनरेटर ),डिजर्ट कूलर ,स्पोर्ट्स कीट ,सी.सी.टी.व्ही सामाग्री,बर्तन सामाग्री ,अग्नि शमन यंत्र सामाग्री (फायर एक्स्टिंग्यूसर ),आरओ वाटर स्थापना आदि कार्य शामिल है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित 56 उप स्वास्थ्य केंद्र ,8 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ,4 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं जिला अस्पताल तथा हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के द्वारा संचालित 20 उप स्वास्थ्य केंद्र ,5 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के मरीजों के मासिक धर्म प्रबंधन की स्वच्छता को दृष्टिगत रखते हुए हाइजेनिक एवं स्वास्थ्य संबंधी सुरक्षा हेतु सेनेटरी नैपकीन वेंडिंग मशीन एवं भस्मक मशीन ( इन्सीनरेटर) की स्थापना की गई है। विश्वनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार सामग्रियों की गुणवत्ता ,कोटेशन,टेंडर प्रक्रिया ,निविदा , इश्तहार प्रकाशन ,भुगतान में नियमों की अनदेखी कर फर्मों से मिलीभगत कर उन्हें अनुचित लाभ दिलाकर शासकीय राशि का अपव्यय किया गया है।
मांग पत्र के बगैर विभिन्न सामाग्रियों की आपूर्ति कर शासकीय राशि का बंदरबाट किया गया है। जिसकी मुख्य सचिव से लोकहित में जांच की मांग की गई है। अब देखना यह है कि 12 बिंदुओं में जांच की मांग को राज्य कार्यालय गंभीरता से लेता है या फिर राजभवन व केंद्रीय जांच एजेंसियों ईडी तक मामला जाता है।

Indian Business News

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!