
लगभग ढाई माह से अधिक दिन गुजर जाने बावजूद इंद्राणी पांडे के विरुद्ध अब तक कोरबा पुलिस प्रशासन ने नहीं की एफआईआर दर्ज.
स्कूल शिक्षिका की लापरवाही से मासूम अव्वल बंजारे की आंख की रोशनी खत्म।
कोरबा (आई.बी.एन -24) कुसमुंडा क्षेत्र चुनचुनी के शासकीय स्कूल पढ़ाई कर रहे मासूम बच्चा अव्वल बंजारे के बाएं आंख की रौशनी पूरी तरह से चली गई है यह घटना तब हुई जब दो बच्चों के बीच लड़ाई हुई। दूसरा बच्चा रिहान ने अव्वल बंजारे के आंख पर डंडे से वार कर दिया जिस वजह से जिस वजह से मासूम बच्चा अव्वल बंजारे अब दुनिया के रंगीन फिजाओं को नहीं देख सकेगा
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बता दें कि जिला शिक्षा अधिकारी कोरबा (छ.ग.) का पत्र क्र. / 5686 / शिकायत / जांच / 2025-26 कोरबा, दिनांक 23.09.2025 ने शासकीय प्राथमिक शाला चुनचुनी (आदर्श नगर कुसमुण्डा ) के शिक्षकों की लापरवाही के कारण रिहान नाम के बच्चे के द्वारा डंडे से मारपीट करने से विद्यालय में अध्ययनरत् अव्वल बंजारे की बायें आंख की रोशनी चली गई है। दिनांक 09.07.2025 को घटना दिवस प्रधान पाठक आकस्मिक अवकाश पर थे और श्रीमती इंद्राणी पांडये संस्था के प्रभार में थी। श्रीमती पाण्डेय द्वारा बच्चे का प्राथमिक उपचार नहीं कराया गया, न ही छात्र के पालक को सूचना दी गई बल्कि बच्चे को 2-3 घण्टे स्कूल में रोककर रखा गया। उक्त घटना के संबंध में जांच कराया गया।
विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी कटघोरा ने जांच प्रतिवेदन में शिक्षिका की लापरवाही के कारण घटना घटित होने की पुष्टि की है। प्रभारी के रूप में उन्होंने जिम्मेदारी का निर्वहन निष्ठापूर्वक नही किया है। श्रीमती इंद्राणी पाण्डेय का उक्त कृत्य छ.ग. सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 की कण्डिका 3 के विपरीत गंभीर कदाचार की श्रेणी में आता है। जिस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी कोरबा से प्राप्त प्रस्ताव के आधार पर छ.ग. सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम-9 के तहत् श्रीमती इंद्राणी पाण्डेय शिक्षिका को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है और इनका मुख्यालय विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय कटघोरा नियत किया गया है। निलंबन अवधि में इन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी। शिकायत करने व लगभग ढाई माह से अधिक दिन गुजर जाने बावजूद इंद्राणी पांडे के ऊपर एफआईआर दर्ज नहीं..आखिर क्यों..?
स्कूली छात्र अव्वल बंजारे के पिता अशोक बंजारे ने जिला कोरबा से संबंधित समस्त जवाबदार एवं जिम्मेदार शासकीय विभागों में शिकायत की है बावजूद अब तक इंद्राणी पांडे के ऊपर एफआईआर दर्ज नहीं की गई है और ना ही उनके ऊपर कोई कार्यवाही, आखिर क्यों..? इसी तरह इंद्राणी पांडे कोरबा जिले के खुले फिजाओं में यहां वहां घूम रही है और इन्हें पुलिस प्रशासन क्यों नहीं पड़ रही है..? आखिर इन्हें किसका मिला है संरक्षण..?

इस मामले पर ऐसे बहुत से सवाल उत्पन्न हो रहे हैं जिनका जिला प्रशासन जवाब नहीं दे पा रही है आखिर क्यों..?