
संवाददाता : प्रियेश दीवान।
कोरबा (आई.बी.एन -24) जंगल उजड़ रहा, सिस्टम सो रहा छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में प्रकृति को एक बार फिर माफियाओं ने निशाना बनाया है। वन परिक्षेत्र जटगा, वन मंडल कटघोरा के अंतर्गत आने वाले ग्राम डूमरमुड़ा के प्रसिद्ध राजगवलिन जंगल में अवैध वृक्ष कटाई का कारोबार अब बेखौफ और सुनियोजित तरीके से चल रहा है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यहां से हर दूसरे दिन 4 से 5 नग हरे-भरे सागौन और अन्य कीमती पेड़ों की कटाई की जा रही है। पिछले 15-20 दिनों में ही 10 से 15 बड़े-बड़े पेड़ काटे जा चुके हैं। सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि ये पूरा खेल वन विभाग के नाक के नीचे हो रहा है।
रात के अंधेरे में होता है काला कारोबार।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि तस्कर दिन में जंगल की रेकी करते हैं और रात 12 बजे से 3 बजे के बीच पिकअप और ट्रैक्टरों में कटे हुए लट्ठों को लोड करके जंगल से बाहर निकाल ले जाते हैं।
“पुलिस और वन विभाग की गाड़ियां गश्त के नाम पर सिर्फ कागजों में दौड़ती हैं। रात में न कोई चेकिंग है न कोई रोक-टोक। कटाई की आवाज आती है, लेकिन कोई आता नहीं” – एक ग्रामीण ने नाम न छापने की शर्त पर बताया।
वन्यजीव और पर्यावरण पर संकट।
राजगवलिन जंगल कोरबा के हरे फेफड़े माने जाते हैं। यहां हिरण, बंदर, नीलगाय और कई तरह के पक्षी निवास करते हैं। लगातार हो रही कटाई से वन्यजीवों का आवास उजड़ रहा है और जैव विविधता को भारी नुकसान पहुंच रहा है।
पर्यावरणविदों का कहना है कि अगर इसी रफ्तार से कटाई होती रही तो अगले 2-3 महीने में पूरा क्षेत्र वृक्ष विहीन हो जाएगा। इससे भूजल स्तर गिरेगा, गर्मी बढ़ेगी और बारिश का चक्र भी प्रभावित होगा।
ग्रामीणों ने लगाए मिलीभगत के आरोप।
ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि कटाई इतने बड़े पैमाने पर हो रही है फिर भी वन परिक्षेत्र अधिकारी जटगा और उनकी टीम की कोई कार्रवाई सामने नहीं आई है। लोगों का सीधा आरोप है कि वन कर्मियों की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा कारोबार संभव नहीं है।
“हमने कई बार शिकायत की, लेकिन हर बार आश्वासन देकर टाल दिया जाता है। तस्करों के हौसले इसलिए बुलंद हैं क्योंकि उन्हें संरक्षण प्राप्त है” – डूमरमुड़ा के एक पंच ने कहा।
क्या कहता है कानून।
भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 26 के तहत आरक्षित वन में पेड़ काटना अपराध है। वहीं धारा 52 के तहत अवैध रूप से कटे पेड़ और तस्करी में प्रयुक्त वाहनों को जब्त किया जा सकता है। दोषियों को 6 महीने से 5 साल तक की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
जनता की मांग।
1. दोषियों पर तुरंत FIR दर्ज कर कड़ी कार्रवाई हो
2. जंगल में रात्रि गश्त बढ़ाई जाए और CCTV/ड्रोन से निगरानी हो
3. तस्करी में लगे सभी पिकअप वाहनों को जब्त। किया जाए
4. मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषी वन कर्मियों पर भी कार्रवाई हो
फिलहाल खबर लिखे जाने तक वन परिक्षेत्र अधिकारी जटगा से संपर्क नहीं हो सका है।
अब देखना ये है कि प्रशासन इस “जंगल माफिया” पर लगाम लगाता है या राजगवलिन को भी नक्शे से मिटने देता है।