
कोरबा (आई.बी.एन -24)। पत्रकारिता के पवित्र पेशे को कुछ तथाकथित लोग बदनाम कर रहे हैं। जिले में पिछले कुछ महीनों से फेसबुक, यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर “न्यूज चैनल” के नाम से वीडियो बनाने वालों की बाढ़ आ गई है। ₹1000-2000 में फर्जी पोर्टल बनवाकर, ब्लॉगर आईडी लेकर ये लोग खुद को पत्रकार बताते हैं।
इनके पास न RNI रजिस्ट्रेशन है, न प्रेस कार्ड, न किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से जुड़ाव। इसके बावजूद ये दुकानदारों, शिक्षकों, सरकारी कर्मचारियों और आम जनता को टारगेट कर रहे हैं। पहले वीडियो बनाकर कमी निकालते हैं, फिर “वायरल कर देंगे” की धमकी देकर 5 हजार से 50 हजार तक वसूली करते हैं।
इस तरह चल रहा वसूली का रैकेट।
वीडियो ट्रैप : बाजार, ऑफिस में जाकर छोटी गलती का वीडियो बनाना
धमकी : “खबर वायरल कर देंगे, बदनामी होगी”
सेटलमेंट : “मामला दबा देंगे” कहकर मोटी रकम मांगना
सोशल मीडिया ब्लैकमेल : पैसा न मिलने पर फेसबुक-यूट्यूब पर “एक्सपोज” वीडियो डाल देना
असली पत्रकार बदनाम।
इन छोलाछाप लोगों की वजह से कोरबा के मेहनती और मान्यता प्राप्त पत्रकारों पर भी जनता भरोसा नहीं कर रही। संविधान ने जो अभिव्यक्ति की आजादी दी है, उसका ये लोग वसूली का हथियार बना रहे हैं।
BNS 2023 में है सजा का प्रावधान
बिना मान्यता के पत्रकार बनकर वसूली करना अब अपराध है।
BNS धारा 308 – वसूली के लिए डराना-धमकाना
BNS धारा 318 – धोखाधड़ी
BNS धारा 356 – मानहानि
IT Act 66E, 67 – निजता भंग और मानहानिकारक वीडियो अपलोड करना
पत्रकार संघ और पुलिस की चेतावनी
सक्रिय पत्रकार फाउंडेशन, छत्तीसगढ़ ने SP कोरबा से मांग की है कि ऐसे फर्जी यूट्यूब-फेसबुक-इंस्टा चैनल और पोर्टलों की जांच कर *BNS 308, 318* के तहत FIR दर्ज की जाए।
जनता ध्यान दें
1. आईडी देखें : असली पत्रकार हमेशा प्रेस कार्ड दिखाएगा।
2. RNI चेक करें : पोर्टल/अखबार का रजिस्ट्रेशन है या नहीं जांचें।
3. फर्जी पोर्टल से बचें : उद्योग आधार पंजीयन कर खुद को पत्रकार बताना गलत है। उद्योग आधार केवल कंपनी के लिए होता है, प्रेस कार्ड जारी करने का अधिकार नहीं।
4. डरें नहीं : वसूली या धमकी पर तुरंत 112 या साइबर सेल 1930 पर शिकायत करें।
पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है। कुछ लोगों की करतूतों से इसे बदनाम न होने दें।