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कोरबा/रजगामार:-सत्ता का रसूख या कानून का मखौल? उधारी के पैसे मांगने गए चिकन व्यवसायी पर ही ठोक दिया हाफ मर्डर का केस…

कोरबा/रजगामार:-सत्ता का रसूख या कानून का मखौल? उधारी के पैसे मांगने गए चिकन व्यवसायी पर ही ठोक दिया हाफ मर्डर का केस….

 

कोरबाकोरबा:-03 जुलाई 2026(आई.बी.एन-24) छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के चौकी राजगमार क्षेत्र से सामने आई यह सनसनीखेज घटना किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है, जहां उधारी के पैसे मांगने गए एक छोटे चिकन व्यवसायी को न सिर्फ बेरहमी से पीटा गया, बल्कि सत्ता और रसूख के दम पर उल्टा उसी के खिलाफ लूट और हाफ मर्डर (जानलेवा हमला) का झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया गया।हर छोटे कारोबारी की तरह अरुण खांडे भी ईमानदारी से अपना चिकन व्यवसाय चला रहा था। उसे क्या मालूम था कि अपनी ही मेहनत की कमाई वापस मांगना उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा गुनाह बन जाएगा।कानून के मुताबिक पीड़ित अरुण ने तुरंत चौकी राजगमार में कपिल और उसके साथियों के खिलाफ रास्ता रोककर मारपीट और जानलेवा हमला करने की शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने कपिल के खिलाफ FIR भी दर्ज कर ली। लेकिन कहानी में असली ट्विस्ट आना अभी बाकी था।अपनी खिसकती साख और पुरानी पंचायत रंजिश का बदला लेने के लिए सत्ता पक्ष के नेता सक्रिय हो जाते हैं।

मकसद साफ था—सच्चे को झूठा और शोषित को ही मुजरिम साबित करना।सत्ता के बल पर पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाया जाता है। जो अरुण और उसके रिश्तेदार अपनी जान बचाकर भागे थे, उन्हीं के ऊपर बंदूक तान दी जाती है। रात के अंधेरे में साजिश का खेल पूरा होता है और पीड़ित अरुण तथा उसके रिश्तेदारों के खिलाफ फर्जी लूटपाट और हाफ मर्डर (धारा 307 के तहत) का संगीन मामला दर्ज कर दिया जाता है।सवाल बेहद संगीन है।

जब पहली FIR पीड़ित अरुण की तरफ से दर्ज थी, जब मारपीट की शुरुआत कपिल ने की थी, तो फिर सत्ता के रसूखदार नेताओं के दखल के बाद पीड़ित पर ही लूट और हाफ मर्डर का मुकदमा कैसे दर्ज हो गया? क्या राजनीति की आड़ में कानून का इस कदर मखौल उड़ाया जाएगा? क्या पुरानी रंजिश निकालने के लिए एक गरीब व्यवसायी को बलि का बकरा बना दिया जाएगा? अब देखना यह है कि क्या उच्च अधिकारी इस रसूख के खेल का पर्दाफाश कर अरुण खांडे को न्याय दिला पाते हैं या नहीं।”

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