रायपुर (आई.बी.एन -24) मातृत्व दिवस के दिन जब पूरा देश माँ की ममता का गुणगान कर रहा था, उसी दिन रायपुर पुलिस ने एक माँ की सूनी गोद फिर से भर दी। मौलीपारा तेलीबांधा से गुम हुई 10 वर्षीय नाबालिग बच्ची को रायपुर पुलिस ने गुजरात के अहमदाबाद से सफल रेस्क्यू कर परिजनों को सौंप दिया। बेटी को सीने से लगाते ही माँ की आँखों से बहते आँसुओं ने बता दिया कि वर्दी वालों ने सिर्फ बच्ची नहीं, एक परिवार की साँसें लौटाई हैं।
5-6 मई की काली रात: जब घर से गायब हुई बिटिया।
मौलीपारा तेलीबांधा निवासी परिवार पर कहर टूटा 5 एवं 6 मई की दरमियानी रात को। 10 साल की मासूम अचानक घर से लापता हो गई। रातभर गली-गली ढूंढने के बाद थके-हारे परिजन सुबह तेलीबांधा थाने पहुंचे। शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामले की नजाकत समझी और धारा 137(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर तुरंत विवेचना शुरू कर दी।
SSP के निर्देश पर बनी स्पेशल टीम, 1200 किमी का पीछा।
मामले को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने विशेष टीम गठित की। साइबर सेल, लोकेशन ट्रेसिंग और मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया गया। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर बच्ची की लोकेशन अहमदाबाद, गुजरात में मिली। समय गँवाए बिना रायपुर पुलिस की टीम अहमदाबाद रवाना हुई। 1200 किलोमीटर का सफर तय कर, स्थानीय पुलिस के सहयोग से दबिश दी गई और बच्ची को सकुशल बरामद कर लिया गया।
मातृत्व दिवस बना पुनर्मिलन का दिन।
रायपुर पुलिस ने तय किया कि बच्ची को मातृत्व दिवस के दिन ही माँ को सौंपा जाए। रविवार को जब टीम बच्ची को लेकर तेलीबांधा थाने पहुंची, तो माहौल भावुक हो गया। माँ ने दौड़कर बेटी को गले लगाया और फफक पड़ी। वहाँ मौजूद हर आँख नम थी। पुलिस अधिकारियों ने बच्ची को चॉकलेट देकर कहा – “बेटा, अब डरना नहीं।”
परिजनों ने कहा – “पुलिस नहीं, भगवान भेजा था”
बच्ची के पिता ने रूंधे गले से कहा, “5 दिन से न नींद थी न भूख। लगा सब खत्म हो गया। पर रायपुर पुलिस देवदूत बनकर आई। मातृत्व दिवस पर इससे बड़ा तोहफा क्या होता।” परिजनों ने SSP रायपुर समेत पूरी टीम का आभार जताया और मिठाई खिलाकर धन्यवाद दिया।
पुलिस का संदेश – “हर बच्चा हमारा अपना”
तेलीबांधा थाना प्रभारी ने बताया, “नाबालिग के मामले में हम जीरो टॉलरेंस पर काम करते हैं। बच्ची डरी हुई थी, काउंसलिंग कराई गई है। आगे की कार्रवाई जारी है।” SSP ने टीम को बधाई देते हुए कहा, “ये रेस्क्यू बताता है कि रायपुर पुलिस सिर्फ कानून की रखवाली नहीं करती, रिश्तों की डोर भी जोड़ती है।”
एक सवाल समाज से भी।
10 साल की बच्ची अहमदाबाद तक कैसे पहुंची, इसके पीछे कौन है – पुलिस जांच कर रही है। पर इस घटना ने फिर सवाल खड़ा किया है कि हम अपने बच्चों को लेकर कितने सतर्क हैं?
आज रायपुर पुलिस ने साबित कर दिया कि वर्दी का रंग खाकी भले हो, दिल में ममता का रंग भी उतना ही गहरा है। मातृत्व दिवस पर एक माँ को उसकी दुनिया लौटाकर रायपुर पुलिस ने पूरे देश को संदेश दिया – “बेटियाँ सुरक्षित हैं, क्योंकि खाकी जाग रही है।”
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