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कटघोरा में वरिष्ठ पत्रकार गणेश दास महंत ने सादगी से मनाया जन्मदिन, अस्पताल में बांटा भोजन — सेवा बनी मिसाल

कटघोरा (आई.बी.एन -24) जब दुनिया जन्मदिन को शोर, केक और आतिशबाजी का नाम दे रही है, तब कटघोरा के वरिष्ठ पत्रकार गणेश दास महंत ने सादगी और सेवा का दीप जलाकर समाज को नई राह दिखाई। दिनांक 10/05/2026 को शाम 8 बजे उन्होंने अपना जन्मदिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, कटघोरा में भर्ती मरीजों एवं उनके तीमारदारों के बीच भोजन वितरित कर मनाया

अस्पताल का माहौल उस शाम किसी उत्सव से कम नहीं था। वार्ड में लेटे मरीजों के मुरझाए चेहरों पर जैसे ही गरमा-गरम पूड़ी-सब्जी चांवल और खीर की खुशबू पहुंची, उनकी आँखें उम्मीद से चमक उठीं। गणेश दास महंत ने अपने हाथों से एक-एक मरीज को भोजन परोसा। किसी बुजुर्ग ने सिर पर हाथ रखकर दुआ दी तो किसी माँ ने नम आँखों से कहा – “आज लगा भगवान खुद खाना देने आए हैं।”

पूरा परिवार बना पुण्य का भागीदार, SJR टीम ने निभाया साथ।


इस सेवा-यज्ञ में महंत परिवार के साथ , भाई प्रकाश महंत का सहयोग, धर्मपत्नी रानू महंत की ममतामयी उपस्थिति, बहू प्रज्ञा महंत का समर्पण, नन्हीं बेटी वेदिका महंत व मिष्ठी महंत की मासूम मुस्कान और पुत्र विद्यांश महंत का उत्साह देखने लायक था। SJR टीम के युवाओं ने भी पूरी तन्मयता से भोजन वितरण से लेकर मरीजों की देखरेख तक हर काम में हाथ बँटाया। केक की जगह जब थालियों में भोजन सजा तो लगा कि यही असली उत्सव है – जहाँ पेट भरता है और आत्मा तृप्त होती है।

जन्मदिन माने दूसरों के जीवन में उजाला करना” – गणेश दास महंत।

भावुक स्वर में गणेश दास महंत ने कहा, “17 साल की पत्रकारिता ने मुझे यही सिखाया कि दर्द वही समझता है जिसने सहा हो। अस्पताल में एक रात बिताने वाला जानता है कि भूख क्या होती है। जन्मदिन पर अगर मैं किसी की भूख मिटा सकूँ, किसी के चेहरे पर मुस्कान ला सकूँ, तो इससे बड़ा उपहार मेरे लिए कुछ नहीं। मालाएँ सूख जाती हैं, पर दुआएँ उम्रभर महकती हैं।”

धर्मपत्नी रानू महंत ने कहा, “हम हर साल मंदिर जाते थे, वहां पूजा करके शाम दोस्तों के साथ केक काटकर मनाते थे, पर आज लगा कि दुखियों की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं। अस्पताल में ही साक्षात ईश्वर दिखे।”

सेवा ही सच्चा उत्सव: कटघोरा को मिला नया आदर्श।

गणेश दास महंत का यह कदम केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज के लिए आइना है। जहाँ लाखों रुपये फूंककर जन्मदिन मनाने का रिवाज है, वहीं उन्होंने सिखा दिया कि 100 लोगों का पेट भरने का सुकून किसी फाइव-स्टार पार्टी से हजार गुना बड़ा है।

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