
रायपुर (आई.बी.एन -24) रोज़गार, प्रशिक्षण और बेहतर भविष्य के सपनों के साथ घर से निकली छत्तीसगढ़ की बेटियों के आँसुओं से भरा वीडियो आज पूरे समाज की संवेदनाओं को झकझोर रहा है। झारखंड के गढ़वा जिले में लगभग 35 युवतियों को कथित रूप से बंधक बनाए जाने एवं घर वापस नहीं जाने देने की खबर अत्यंत पीड़ादायक और चिंताजनक है।
वायरल वीडियो में बेटियाँ रोते हुए मदद की गुहार लगा रही हैं। एक युवती की वेदना भरी आवाज़ केवल उसके परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन हजारों गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की चिंता बन चुकी है, जो अपने बच्चों को बेहतर भविष्य की आशा में बाहर भेजते हैं। यदि सचमुच आर्थिक मजबूरी का लाभ उठाकर बेटियों को रोका गया है, तो यह केवल कानून का उल्लंघन नहीं बल्कि मानवता पर भी आघात है।

भाजपा झुग्गी झोपड़ी प्रकोष्ठ छत्तीसगढ़ के प्रदेश सह संयोजक राजेश यादव ने मुख्यमंत्री विष्णु
देव साय जी
एवं गृहमंत्री विजय शर्मा जी
से भावुक अपील करते हुए मांग की है कि सभी बेटियों को सुरक्षित मुक्त कराकर तत्काल उनके घर वापस लाया जाए तथा पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए।
ज्ञात हो कि इन युवतियों में कांकेर, धमतरी सहित छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों की बेटियाँ शामिल बताई जा रही हैं, जो नर्सिंग कार्य एवं प्रशिक्षण के लिए झारखंड गई थीं। अब यह मामला केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह बेटियों की सुरक्षा, मानव तस्करी की आशंका और श्रमिक शोषण जैसे गंभीर विषयों से जुड़ गया है।
समाज और शासन दोनों की जिम्मेदारी है कि बेटियों के सपनों को बंधक बनने से बचाया जाए।
क्योंकि किसी भी सभ्य समाज की पहचान उसकी बेटियों की सुरक्षा, सम्मान और स्वतंत्रता से होती है।