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फर्जी दस्तावेज से बना प्रधान पाठक, 15 साल बाद खुली पोल: असली नाम रामदुलार निकला, DEO ने किया सस्पेंड।

बलरामपुर (आई.बी.एन -24) जिले के वाड्रफनगर विकासखंड में शिक्षा विभाग को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। कोल्हुआ की शासकीय प्राथमिक शाला में पदस्थ प्रधान पाठक ने नाम बदलकर और फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के सहारे 15 साल तक सरकारी नौकरी की। कलेक्टर के निर्देश पर हुई जांच में फर्जीवाड़ा उजागर होते ही जिला शिक्षा अधिकारी ने आरोपी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

ग्रामीण की शिकायत से खुला राज
ग्राम कुशफर निवासी सत्यनारायण ने 11 अप्रैल 2025 को कलेक्टर को साक्ष्यों सहित शिकायत सौंपी थी। शिकायत में बताया गया कि ग्राम पंचायत कुशफर के सरपंच लालमन सिंह और कोल्हुआ स्कूल के प्रधान पाठक लालमन सिंह – दोनों एक ही पिता रामवृक्ष का नाम लिख रहे हैं। आशंका जताई गई कि एक ही व्यक्ति दो जगह लाभ ले रहा है या फिर दस्तावेजों में हेरफेर कर नौकरी हथियाई गई है।

जांच में निकला ‘लालमन’ नहीं ‘रामदुलार’
कलेक्टर के निर्देश पर DEO द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच टीम ने जब दस्तावेज खंगाले तो सनसनीखेज खुलासा हुआ। जांच प्रतिवेदन के अनुसार कोल्हुआ में पदस्थ प्रधान पाठक का असली नाम रामदुलार पिता जीतू है। आरोपी ने असली लालमन सिंह पिता रामवृक्ष के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों का दुरुपयोग कर विभाग को गुमराह किया और प्रधान पाठक के पद पर नियुक्ति हासिल कर ली।

DEO की कार्यवाही, FIR की तैयारी
जांच रिपोर्ट में दोष सिद्ध होने पर जिला शिक्षा अधिकारी डी.के. राय ने रामदुलार उर्फ फर्जी लालमन सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। DEO ने बताया कि आरोपी के खिलाफ विभागीय जांच के साथ-साथ थाने में FIR दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अब तक लिए गए वेतन की वसूली भी की जाएगी।

क्या कहते हैं नियम
फर्जी दस्तावेज से नौकरी लेने पर IPC की धारा 420, 467, 468, 471 के तहत 7 साल से आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। साथ ही पूरी सैलरी ब्याज सहित वसूली जाती है और सरकारी सेवा से बर्खास्तगी तय है।

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