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लाइन परिचारक संविदा मानव संसाधन नीति 2025 का छत्तीसगढ़ विद्युत संविदा कर्मचारी संघ ने किया विरोध।

 

कोरबा, 18 अप्रैल 2026: पावर कंपनी प्रबंधन द्वारा 18 अप्रैल 2026 को जारी “लाइन परिचारक संविदा मानव संसाधन नीति 2025” का छत्तीसगढ़ विद्युत संविदा कर्मचारी संघ ने कड़ा विरोध किया है। संघ ने इसे “शोषण की नीति” करार दिया है।

विरोध के मुख्य बिंदु:-

1. समायोजन की बजाय शोषण
संविदा कर्मचारी लंबे समय से नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं। संघ का आरोप है कि नई नीति समायोजन की जगह सीमित लाभ देकर अफसरशाही और तानाशाही बढ़ाती है।

2. संविदा अधिनियम 2012 का उल्लंघन
प्रबंधन समायोजन न करने के लिए संविदा अधिनियम 2012 का हवाला देता है, लेकिन उसी अधिनियम में शासन की अनुमति बिना संशोधन कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट व विभिन्न हाई कोर्ट के आदेशों में 10 साल की सेवा पूर्ण करने वाले संविदा कर्मचारियों के समायोजन का निर्देश है। इसके बावजूद नीति में 10 साल बाद भी सिर्फ 1-1 साल की सेवा वृद्धि के लिए कठोर शर्तें रखी गई हैं।

3. खतरनाक काम की जिम्मेदारी
नियमानुसार 33/11 केवी लाइन का परमिट केवल सहायक लाइनमैन या उससे ऊपर के नियमित कर्मचारी दे सकते हैं। नई नीति में यह जिम्मेदारी संविदा कर्मचारियों पर डाली जा रही है, जो सुरक्षा मानकों का उल्लंघन है।

4. सेवा वृद्धि में दुरुपयोग
अधिकारियों पर आरोप है कि 8 घंटे की जगह 24 घंटे काम लिया जाता है। दुर्घटना होने पर सारा दोष संविदा कर्मचारियों पर डालकर उनकी सेवा वृद्धि रोक दी जाती है।

आगे की रणनीति
विद्युत संविदा कर्मचारी संघ के महामंत्री कमलेश भारद्वाज एवं क्षेत्रीय अध्यक्ष VP बंजारे (बिलासपुर क्षेत्र) ने कहा कि आगामी दिनों में इस नीति का पूर्ण विरोध किया जाएगा। पावर कंपनी के सामने एकमात्र मांग “समायोजन” रखी जाएगी। यदि मांग पर सकारात्मक पहल नहीं हुई तो संघ अनिश्चितकालीन आंदोलन करेगा।

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