
कोरबा/कटघोरा(आई.बी.एन -24) पाली जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत केराकछार में 15वें वित्त आयोग की राशि में भारी अनियमितता का मामला सामने आया है। शासकीय भवनों की मरम्मत के नाम पर लागत से दो गुना अधिक राशि का आहरण कर सरकारी पैसे का दुरुपयोग किया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के विकास कार्यों में सरपंच-सचिव की मनमानी हावी है।
मामले का खुलासा:
जांच में सामने आया है कि ग्राम पंचायत केराकछार में 15वें वित्त मद से कराए गए मरम्मत कार्यों में व्यापक भ्रष्टाचार हुआ है:
1. प्राथमिक शाला छत मरम्मत:- कार्य की वास्तविक लागत से दो गुना अधिक राशि निकाली गई।
2. आंगनबाड़ी भवन मरम्मत:- भौतिक रूप से कोई काम नहीं हुआ, सिर्फ कागजों में मरम्मत दर्शाकर भुगतान कर लिया गया।
3. माध्यमिक शाला अहाता मरम्मत:- महज 15 मीटर अहाता मरम्मत के नाम पर 93,000/- रुपये का आहरण कर लिया गया।
4. पेयजल कार्य में खेल:- सबमर्सिबल पंप सह सिंटेक्स स्थापना की लागत 60,000/- रुपये है, जबकि रनिंग वाटर मरम्मत के नाम पर 73,000/- रुपये का भुगतान कर दिया गया।
5. हैंडपंप व नाली सफाई:- हैंडपंप मरम्मत और नाली साफ-सफाई जैसे छोटे कार्यों के नाम पर भी 15वें वित्त की मोटी राशि का वारा-न्यारा कर दिया गया।
ग्रामीणों में आक्रोश:-
ग्राम केराकछार के ग्रामीणों का कहना है कि “गांव के विकास में सरपंच-सचिव की मनमानी चल रही है। शासकीय भवनों की हालत जस की तस है, लेकिन कागजों में लाखों रुपये की मरम्मत हो चुकी है। 15वें वित्त का पैसा जनता के विकास के लिए आता है, घोटाले के लिए नहीं।”
क्या कहते हैं नियम:-
15वें वित्त आयोग की गाइडलाइन के अनुसार राशि का उपयोग पारदर्शिता के साथ ग्राम सभा की स्वीकृति से होना चाहिए। प्रत्येक कार्य का तकनीकी-प्रशासकीय अनुमोदन और फोटो सहित जियो-टैगिंग अनिवार्य है।
अब आगे क्या:-
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषी सरपंच-सचिव के विरुद्ध FIR दर्ज कर रिकवरी की मांग की है। यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण कलेक्टर कार्यालय का घेराव करेंगे।