
महाकवि हर्षवर्धन के रूपकों पर शोध, सीमित संसाधनों में असाधारण उपलब्धि | शोध निर्देशक डॉ. बहुरन सिंह पटेल
कोरबा(आई.बी.एन -24) ग्राम मोरगा, जिला कोरबा निवासी वासुदेव एक्का ने संस्कृत विषय में पीएचडी *(विद्यावारिधि)* की उपाधि अर्जित कर अपने परिवार, गृहग्राम एवं पदस्थ संस्थान का नाम रोशन किया है। वासुदेव एक्का वर्तमान में शासकीय वेदराम महाविद्यालय मालखरौदा, जिला-सक्ती में सहायक प्राध्यापक (संस्कृत) के पद पर पदस्थ हैं।
शोध का विषय:-
वासुदेव एक्का का शोध शीर्षक _“महाकविहर्षवर्धनस्य रूपकेषु लोकतत्त्वानामनुशीलनम्”_ रहा। अपने शोध के माध्यम से उन्होंने महाकवि हर्षवर्धन के रूपकों में निहित लोकतत्वों का गहन अनुशीलन कर भारतीय ज्ञान परंपरा, वैदिक एवं लौकिक संस्कृत की समृद्ध विरासत को आधुनिक जीवन से जोड़ने का सशक्त प्रयास किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह शोध न केवल शोधार्थियों और शिक्षाविदों के लिए उपयोगी सिद्ध होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को संस्कृत भाषा, भारतीय दर्शन और संस्कृत साहित्य के लोकतत्वों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
कठिन परिश्रम की मिसाल:-
संस्कृत जैसी प्राचीन, गूढ़ और बौद्धिक भाषा में शोध कर पीएचडी की उपाधि अर्जित करना अपने आप में असाधारण उपलब्धि मानी जाती है। ग्रामीण पृष्ठभूमि और सीमित संसाधनों के बावजूद वासुदेव एक्का ने वर्षों की कठोर परिश्रम, सतत अध्ययन, अनुशासन और अडिग संकल्प से यह सिद्ध कर दिया कि प्रतिभा और परिश्रम के आगे परिस्थितियां बाधा नहीं बन सकतीं।
मार्गदर्शन एवं आभार:-
इस शोध कार्य की सफलता में शासकीय दू.श्री वै. स्नातकोत्तर संस्कृत महाविद्यालय रायपुर के *डॉ. बहुरन सिंह पटेल, विभागाध्यक्ष-व्याकरण* ने शोध निर्देशक के रूप में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान किया। वासुदेव एक्का ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता, पत्नी, भाई-बहन, पुत्र-पुत्री, प्राध्यापकगण एवं गुरुजनों के सकारात्मक सहयोग को दिया है।
क्षेत्र में हर्ष का वातावरण:-
इस उपलब्धि के बाद गृहग्राम मोरगा और पदस्थ स्थान मालखरौदा सहित पूरे क्षेत्र में हर्ष और उत्साह का वातावरण है। ग्रामीणों, सामाजिक संगठनों, शिक्षाविदों एवं शुभचिंतकों ने वासुदेव एक्का को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।