
विशेष संवाददाता दीपक महंत की रिपोर्ट ।
कोरबा/पाली (आई.बी.एन. न्यूज) इन दिनों पिकअप वाहन के माध्यम से पाली और चैतमा क्षेत्र में पिकअप में भरकर बैलों के खरीदकरों को लाते ले जाते अक्सर देखे जा रहें है क्योंकि चैतमा और चैतमा के आसपास के वन और ग्रामीण क्षेत्रों में थोक भाव में बैलों की खरीदी बिक्री के कार्यों में काफी बढ़ोत्तरी हो रही है । सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार सरगुजा , जसपुर संभाग से भारी मात्रा में बैल खरीदार चैतमा और आसपास के क्षेत्रों में मवेशी खरीदने यहां तक आया करते है और बाहर ले जाकर अलग अलग जगहों में बेचा जाता है और कई बार देखा गया है अधिक के संख्या में बैलों की टोली को भारी मात्रा में सुरका सपलवा पहाड़ी क्षेत्रों के रास्ते से बिक्री हेतु बाहर से कंटेनर में भरकर लाया जाता है ।
बैल खरीदी बिक्री का ये दल कभी पटपरा तो कभी अमलीकुंडा (इरफ) के जंगली इलाकों में थोक भाव में और चिल्लर भाव में खरीदी बिक्री का काम करती है ।
अब ये सब देख कर ये नही पता चल पता की ये पशुओं को किसानों को ही बेचने के उद्देश्य से लाया जाता है या किसी और उद्देश्य से ये ठीक से पता नही चल पाता । और इन पशु व्यापारियों के पास इस संबंध में कोई ठोस लाइसेंस और सभी पशुओं का वैध रशीद या कागजात होता भी है या नहीं ये भी समझ से परे है ।
I जब इन्हें पहाड़ियों और जंगल के रास्ते से भारी मात्रा में लाया जाता है तो इन पशु व्यापारियों के पास इनके लिए प्रयाप्त मात्रा में खिलाने के लिए चारा होता भी है या नहीं ये भी सोचने का विषय है
हालांकि सविधान में पशुओं की सुरक्षा के लिए कई कानून बनाए गए है परंतु इन पशु व्यापारियों को इसका पालन करते नही देखा जाता , कभी कभी इस क्षेत्र के ग्रामीणों से ये भी जानकारी मिलती है की जो बैल पहाड़ी रास्तों से लाते लाते थक कर और चारा के अभाव में मर जाता है उस पशु के शव को जंगल के झाड़ियों या किसी खेत में फेक दिया जाता है ।
हाल ही में बीते दिनांक चैतमा के पेट्रोल पंप के पास से इस तपाने वाली तेज गर्मी में दो बैलों को पिकअप वाहन में भरकर ले जाते देखा गया पूछने पर उसे कोरबा जिले से बाहर ले जाने की बात कह रहे थे । अब ये सब कहां तक सही है और कहा तक गलत है ये तो जब तक प्रशासन सही सुध लेकर इन पर कोई आवश्यक कार्यवाही नही करती है तब तक सब एसे ही चलता रहेगा ।
आए दिनों आसपास के क्षेत्रों में गौ या मवेशी तस्करी की खबरे उड़ कर लोगों के कानों तक सुनाई देती रहीं हैं और हाल ही रतनपुर पुलिस के द्वारा भी इन मवेशी तस्करों पर ठोस कार्यवाही कर जेल भेजा गया है पर पाली, चैतमा और कटघोरा के थाना क्षेत्रों और इलाकों में इस तरह की कोई ठोस कार्यवाही करते अबतक तो नही देखा गया है । थोक के भाव में जिन जिन जगहों पर इन पशुओं का खरीदी बिक्री किया जाता है उसका पैसा से काफी बड़े बड़े अफसर शाह और नेताओं के जेब को गरम किया जाता है इस तरह की भी जानकारी भी प्राप्त हो रही है । वैसे तो ये मवेशी तस्करी कहे या सामान्य खरीदी बिक्री कहे काफी वर्षो से यह खेल कोरबा जिले के पाली और कटघोरा के वन और ग्रामीण इलाकों में चल रहा है ।
गौ सुरक्षा के नाम से बड़े बड़े दावा करने वाली संगठन या पार्टी आज सत्ता परिवर्तन होने के बाद आखिर है कहा और इन पशुओं का सुध भी लेने क्यों नही दिख रही है या ये संगठन भी खाना पूर्ति कर शांत हो चुकी है । क्या गौ या मवेशी सुरक्षा के बड़े बड़े इनके दावे के दावे ही रह जायेंगे या पशु के खरीदी बिक्री में सही गलत का कोई सुध भी लेंगे ये तो श्री राम जी ही जाने ।