
कोरबा/पाली(आईबीएन 24) पाली विकासखंड के अंतिम छोर में बसने वाली समीपवर्ती ग्राम ढुकुपथरा जिसे कोरबा जिले का अंतिम ग्राम पंचायत कहा जा सकता है जो नदी क्षेत्र में बसा हुआ है जिसके बाद से बिलासपुर जिले की सीमा क्षेत्र आरंभ हो जाती है ।
वर्तमान समय में त्रिस्तरीय चुनावों की तैयारियों को लेकर ग्राम पंचायत ढुकुपथरा
के ग्राम प्रधान के कार्यकाल पूर्ण कर चुके शिक्षित युवा सरपंच राजकुमार बिंझवार ने अपनी पत्नी अमोला बाई बिंझवार के पक्ष से पुनः दावेदारी प्रस्तुत किया है उन्होने कहा की जनता जनार्दन यदि उन्हे फिर मौका देती है तो आगामी कार्यकाल में स्थाई बांध निर्माण और पेयजल,पानी बचाओ के मुद्दो पर काम करने की बात कही ।
ज्ञात हो कि 5 वर्ष के कार्यकाल में सरपंच पद पर पीठासीन होकर ग्राम के विकसित गतिविधियों पर आईबीएन 24 न्यूज के टीम द्वारा चर्चा करने पर विभिन्न विकास के पहलुओं पर राजकुमार बिंझवार ने ग्राम पंचायत के क्रमिक वृद्धि को व्यक्त करते हुए कहा कि
जनता तक सभी शासन के द्वारा प्रदत्त योजनाओं ,मूलभूत सुविधाओं को पहुंचाने का पूरा प्रयास कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे । उसके साथ साथ उन्होने कहा वे ग्राम को विकसित परिदृश्य के रूप में देखना चाहतें है जो आर्थिक,सामाजिक, तकनीकी रूप से प्रगति करने वाला ग्राम हो , राजकुमार बिंझवार ने कहा की विगत वर्ष 2008 से एक सीमा विवाद बिलासपुर जिला कोरबा जिला के बीच ग्राम ढुकुपथरा और ग्राम सीस बिलासपुर जिले के मध्य से चलते आ रहा था जिसमें हमारे ग्राम के अनेक किसानों के भूमि और ग्राम ढुकुपथरा
क्षेत्र के सीमावर्ती शासकीय भूमि को डोजर चलवाकर कब्जा करने के उद्देश्य से यह कार्य बाहरी लोगों द्वारा किया जा रहा था यह सरहद विवाद समय के साथ साथ उग्र रूप धारण करते जा रहा था और जब से कोरोना काल लगा तब से वह लड़ते लड़ते आ रहे थे जिस समय उन्होने सरपंच का पदभार लिया तब ग्राम वासियों ने इस विवाद को सुलझाने का जिम्मा उन्हे सौंपा था और ग्राम के पंच और ग्रामीणों के एकता सहभागिता और सामानजस्यता से इस लड़ाई को लड़कर इस सीमा विवाद से निपटकर हमारे ग्राम के समीप वर्तीय भूमि को छुड़ाकर इस सीमा विवाद की लड़ाई को सुलझाकर 15 किसानों को उस भूमि का पट्टा को वापस दिलाया गया जिसे डोजर चलवाकर बिलासपुर जिले के बाहरी लोगों द्वारा कब्जा कर रखा गया था । शेष भूमि को खेल मैदान के लिए आरक्षित किया गया और शेष बचे भूमि को शासन द्वारा प्रद्त्त मूलभुत सुविधाओं के लिए , जैसे समुदायिक भवन , स्वास्थ्य केंद्र के लिए आरक्षित रखवाया गया है ।
साथ ही सूची के अनुसार ग्राम में आवास भी पूर्ण हो चुका है और बचे हितग्राहियों के खाते में रकम भी आ चुका है ।
इसके साथ ही सरपंच कार्यकाल पूर्ण कर चुके राज कुमार बिंझवार ने और उनकी सरपंच प्रत्याशी पत्नी अमोला बाई बिंझवार ने कहा गांव से होकर गुजर रहे गांजर नदी के कायाकल्प करने संबंधी बात करते हुए उन्होने ग्राम में स्टॉप डेम निर्माण का होना बेहद जरूरी बताया । अक्सर देखा जाए तो नदी क्षेत्र में पड़ने वाले ग्रामों में गर्मी के दिनों में जल संकट की समस्या बनी रहती है क्योंकि स्टॉप डेम नही होने से पानी रूक नही पाति और जल स्तर काफी नीचे चल जाता है जिससे सिंचाई से लेकर अन्य कार्यों के लिए जल संकट का सामना करना पड़ता है ।
स्टाप डेम में पानी थमा रहने से आसपास के गांव में लगे ट्यूबेल बोरिंग में पानी का लेबल बहुत बढ़ जाता है, जिससे नदी किनारे से दूर किसानों को भी इसका फायदा मिलती है।
सरपंच दंपती ने स्थाई बांध के फायदे को बताते हुए कहा की गांव की नदियों में स्टॉप डेम बनाने से कई फ़ायदे होते हैं:-
स्टॉप डेम से आस-पास के गांवों में पानी का स्तर बढ़ता है ।
इससे नदी किनारे से दूर रहने वाले किसानों को भी सिंचाई का फ़ायदा मिलता है ।
स्टॉप डेम से रवि और खरीफ़ दोनों सीज़न में सिंचाई की जा सकता है ।
स्टॉप डेम से जीव-जंतुओं को भी फ़ायदा होता है और पीने के लिए उन्हें भरपूर पानी मिलता है।
स्टॉप डेम से मछली पालन और मछली पकड़ने जैसी फायदे हो सकती है ।
स्टॉप डेम के पास सैलानी पिकनिक मनाने आते हैं ।
स्टॉप डेम से भू-जल स्तर बढ़ता है ।
स्टॉप डेम से आस-पास के इलाके की मिट्टी में नमी बढ़ती है.
स्टॉप डेम से फसलों की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध रहता है और
स्टॉप डेम से भूमि की उर्वरकता भी बढ़ती है ।
यह सभी बात बताते हुए उन्होंने कहा की हमारे गांव के नदी में भी स्टॉप डेम का निर्माण होना जरूरी है जिससे गांव के किसानो तथा अन्य लोगों को इससे बहुत फायदा होगा ।
इन सभी विकासशील मुद्दो को लेकर वे अपनी पत्नी के पक्ष से दावेदारी करेंगे और उन्हें गांव की जनता पर पूरा भरोसा है और उन्हें लोगों का पूरा पूरा सहयोग भी प्राप्त हो रहा है।