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जिला पंचायत सदस्य ने मारुति क्लीन कोल एंड पॉवर लिमिटेड बांधाखार पर लगाए गंभीर आरोप, मंत्री केदार कश्यप से जांच की मांग।

पाली/कोरबा, जिला पंचायत कोरबा क्षेत्र क्र. 08 की सदस्य एवं भाजपा नेत्री श्रीमती माया रूपेश कंवर ने वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री माननीय श्री केदार कश्यप जी को पत्र लिखकर ग्राम बांधाखार-नुनेरा क्षेत्र में संचालित मारुति क्लीन कोल एंड पॉवर लिमिटेड, बांधाखार के प्लांट द्वारा कथित अनियमितताओं की जांच और कार्यवाही की मांग की है।

श्रीमती कंवर ने अपने पत्र क्रमांक DDC/KRB/82/2026 में कहा है कि स्थानीय स्तर पर कंपनी के खिलाफ गंभीर शिकायतें सामने आई हैं, जिसमें वन, जल एवं स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग में नियमों के उल्लंघन की आशंका है।

स्थानीय लोगों की शिकायत के अनुसार जांच के प्रमुख बिंदु :-

1. वन भूमि पर अवैध कब्जा और बाउंड्री निर्माण: ग्रामीणों का आरोप है कि नुनेरा स्थित वन भूमि कंपार्टमेंट क्रमांक 594 में कंपनी ने वन भूमि पर कब्जा कर बाउंड्री बना ली है। इसकी राजस्व एवं वन अभिलेखों से जांच हो कि कंपनी के पास वैधानिक अनुमति है या नहीं।

2. बांस एवं साल वृक्षों को क्षति: क्षेत्र में लगे बांस तथा घने साल वृक्षों को हटाने/नष्ट करने की शिकायत है। वन विभाग की स्वतंत्र टीम से मौके पर जांच कराकर क्षति का आंकलन करने की मांग।

3. लीलागर नदी के प्रवाह को रोककर औद्योगिक उपयोग: आरोप है कि स्थानीय आस्था से जुड़ी लीलागर नदी के प्रवाह को अवरोधित कर पानी का उपयोग पॉवर प्लांट के लिए किया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों के जल अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।

4. खलारी बांध के पानी का पॉवर प्लांट हेतु उपयोग: सिंचाई विभाग द्वारा कृषि हित में निर्मित खलारी बांध के जल का उपयोग पॉवर प्लांट की औद्योगिक आवश्यकता के लिए किया जा रहा है। कंपनी को पानी के उपयोग की अनुमति किस प्राधिकारी ने, किन शर्तों पर दी है, इसकी जांच आवश्यक है।

5. आबादी से 100 मीटर दूरी पर फ्लाईऐश राखड़ डंपिंग: पॉवर प्लांट से निकलने वाले फ्लाईऐश राखड़ को आबादी क्षेत्र से महज 100 मीटर दूर मुख्य मार्ग किनारे डंप किया जा रहा है, जिससे निकलने वाली धूल-कण से आसपास के रहवासी, किसान एवं पशु प्रभावित हो रहे हैं।

6. पर्यावरण एवं जल संसाधनों पर प्रभाव: वन भूमि, नदी एवं बांध के औद्योगिक उपयोग तथा प्रदूषित जल नदी में छोड़ने से कृषि, पेयजल, पर्यावरण एवं जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव एवं स्वास्थ्यगत समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।

7. स्थानीय प्रभावित ग्राम पंचायतों की उपेक्षा: कंपनी द्वारा प्रभावित ग्राम पंचायतों में मूलभूत सुविधाएं, जनहितकारी कार्य अथवा CSR के तहत विकास कार्य पर्याप्त रूप से नहीं कराए जाने की भी शिकायत है।

श्रीमती कंवर ने मंत्री महोदय से जनहित एवं पर्यावरण संरक्षण को दृष्टिगत रखते हुए शीघ्र संबंधित विभागों की संयुक्त टीम से जांच कराकर आवश्यक कार्यवाही करने एवं कार्यवाही की प्रतिलिपि उपलब्ध कराने का आग्रह किया है।

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