कलेक्टर को शिकायत देकर शासकीय कामकाज में कथित दखल और वसूली के आरोपों की जांच की मांग।

बांकीमोंगरा। नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा क्षेत्र में पार्षद प्रतिनिधि की भूमिका को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। शिकायतकर्ताओं ने राकेश पटेल और जगदीश पटेल की भूमिका पर सवाल उठाते हुए जिला प्रशासन से मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में दोनों पर पार्षद प्रतिनिधि के नाम पर विभिन्न शासकीय मामलों में कथित हस्तक्षेप और लोगों पर दबाव बनाने के आरोप लगाए गए हैं।
कहां से शुरू हुआ विवाद?
कलेक्टर को सौंपे गए शिकायत आवेदन में कहा गया है कि राकेश पटेल एवं जगदीश पटेल स्वयं को पार्षद प्रतिनिधि बताते हुए नगर पालिका सहित अन्य मामलों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक ठेका, रोजगार, राशन कार्ड, पेंशन तथा SECL के L&R से जुड़े मामलों में भी लोगों के बीच उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
शिकायत में आम लोगों से कथित रूप से राशि की मांग या वसूली किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
प्रशासन से उठाया गया सबसे बड़ा सवाल
शिकायतकर्ताओं ने मूल रूप से यह सवाल उठाया है कि निर्वाचित पार्षद की ओर से किसी व्यक्ति को प्रतिनिधि के रूप में किस सीमा तक शासकीय कार्यों में हस्तक्षेप करने का अधिकार है।
उनकी मांग है कि इस संबंध में प्रशासन स्पष्ट करे कि राकेश पटेल और जगदीश पटेल की अधिकृत भूमिका क्या है और उन्हें किस स्तर तक प्रतिनिधित्व का अधिकार प्राप्त है।
दस्तावेजों के साथ शिकायत
शिकायत के साथ छत्तीसगढ़ राजपत्र क्रमांक 439, दिनांक 6 अगस्त 2026 की प्रति सहित अन्य दस्तावेज और कथित फोटो-वीडियो साक्ष्य संलग्न किए जाने का उल्लेख किया गया है।
शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से इन दस्तावेजों और साक्ष्यों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की है।
किस-किस अधिकारी तक पहुंचा मामला?
मामले की प्रतिलिपि SDM कटघोरा, नगर पालिका आयुक्त, नगर पालिका अध्यक्ष बांकीमोंगरा सहित संबंधित अधिकारियों को भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। इससे संकेत मिलता है कि शिकायतकर्ता मामले में प्रशासनिक स्तर पर स्पष्ट जांच चाहते हैं।
अब जांच से खुलेगा मामला
फिलहाल पूरा विवाद शिकायत में लगाए गए आरोपों और दस्तावेजों के आधार पर सामने आया है। ऐसे में निर्णायक स्थिति प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। जांच में यह देखा जाना महत्वपूर्ण होगा कि राकेश पटेल और जगदीश पटेल वास्तव में किस हैसियत से शासकीय मामलों में भूमिका निभा रहे थे, क्या उन्हें कोई अधिकृत जिम्मेदारी दी गई थी और शिकायत में लगाए गए वसूली अथवा हस्तक्षेप के आरोपों में कितनी सच्चाई है।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्तियों की भूमिका पर कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। वहीं आरोप प्रमाणित नहीं होने की स्थिति में प्रशासन को तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करनी होगी।