क्राइमछत्तीसगढ़राजनीति

कुसमुंडा एसईसीएल का दबंगई, बिना ग्राम सभा कराए स्थानीय ग्रामीणों के जमीनों पर अवैध कब्जा।

ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर व अन्य जवाबदार अधिकारियों से की शिकायत

रिपोर्ट/ जावेद अली आज़ाद

कोरबा(आई.बी.एन -24) कोरबा जिला क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पाली, पड़निया में बिना ग्राम सभा कराए व सूचना, जानकारी दिए बगैर साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड कुसमुंडा (एसईसीएल) के जवाबदार एवं जिम्मेदार अधिकारियों ने ग्रामीणों की जमीनों और खेती की जा रही उपजाऊ भूमियों पर भारी भरकम मशीनें चलाकर समतल मैदान बना देने का गंभीर आरोप लगाया है। उपजाऊ भूमि को अधिग्रहण कर लेने से ग्रामीणों का जीवन यापन खतरे पर है। फसले बर्बाद कर दी गई है। बिना उचित मुआवजा, पुनर्वास, अन्य सुविधाए उपलब्ध कराए बगैर मनमाने तरीके से एसईसीएल के जीएम सचिन ताना पाटील और सर्वे ऑफिसर नवीन चंद्र पर पर जमीन कब्जा करने का गंभीर आरोप लगाया गया है। वही आज उक्त दिनांक को प्रभावित क्षेत्र के लोगों के द्वारा की जा रही पैदल यात्रा रोकने का प्रयास करने संबंधी क्षेत्र के सर्वमंगला चौकी प्रभारी, तहसीलदार और एसडीएम मौके पर मौजूद रहे।

मौजूदा अधिकारियों की बात को अनसुनी कर आखिरकार ग्रामीणों ने कुसमुंडा एसईसीएल के विरोध में पैदल यात्रा को अंजाम दिया।

बता दें कि कोयला उत्खनन के लिए अवैध तरीके से भूमि अधिग्रहण करना वह भी बिना ग्राम सभा कराए, पांचवी अनुसूची और पेशा कानून एक्ट का खुला उल्लंघन है। आरोप है कि भू स्थापित ग्रामीणों की जमीन को अवैध कब्जा कर कोयला खदान बनाने में कुसमुंडा एसईसीएल के अधिकारी कोई कसर नहीं छोड़ रहे है।

स्थानीय निवासियों का सैकड़ो की तादात में सड़कों पर शांतिपूर्वक पैदल मार्च–

बता दें कि दिनांक 18 मार्च 2026 को पाली–पड़निया भूविस्थापित और छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना के सेनानियों का भरी जनसंख्या में एकत्रित होकर कोरबा सिटी सड़क पर पैदल मार्च निकाला गया। जहां मां सर्वमंगला मंदिर से होते हुए कोरबा सीटी में प्रस्थान कर कलेक्टर कार्यालय तक पैदल चलकर विरोध प्रदर्शन किया गया। विरोध प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं ने लगभग 10 किलोमीटर पैदल यात्रा की। जिस दौरान कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर कार्यकर्ताओं ने जिम्मेदार अधिकारियों को ज्ञापन सौंपते हुए पांच दिवस के भीतर अपनी जटिल समस्याओं का निराकरण करने हेतु की शिकायत की है।

पांचवी अनुसूची और पेशा कानून–

पांचवीं अनुसूची और पेसा (PESA) कानून, 1996 के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को जनजातीय भूमि पर अवैध कब्जे को रोकने और खाली कराने की सर्वोच्च शक्ति प्राप्त है। यह कानून जनजातीय जमीनों के गैर-जनजातीय लोगों को हस्तांतरण पर रोक लगाता है और ग्राम सभा को संसाधनों के प्रबंधन व विवाद समाधान का अधिकार देता है।

ग्राम सभा की सर्वोच्चता–

अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा स्वशासन की मूल इकाई है, जो परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करने में सक्षम है।

भूमि सुरक्षा–

पेसा कानून के तहत, ग्राम सभा की पूर्व अनुमति के बिना भूमि का अधिग्रहण नहीं किया जा सकता।

अवैध कब्ज़ा हटाना–

ग्राम सभा को अवैध कब्ज़ा खाली कराने की वास्तविक शक्ति प्राप्त है।

संविधान के तहत सुरक्षा–

संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत राज्यपाल को जनजातीय भूमि के अवैध हस्तांतरण को रोकने और वापस दिलाने की शक्ति प्राप्त है।

महत्वपूर्ण–

पेसा कानून (PESA Act) ग्राम सभाओं को सशक्त बनाता है ताकि वे जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों को सुनिश्चित कर सकें।

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