
कोरबा (आई.बी.एन -24): सीएसईबी की पुरानी कॉलोनियों में चल रही वृक्ष कटाई के बीच इमारती लकड़ी चोरी का मामला अब एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा कर रहा है। शुरुआती तौर पर 7 पेड़ों की लकड़ी चोरी की रिपोर्ट दर्ज हुई थी, लेकिन पुलिस और वन विभाग की संयुक्त जांच में मामला कहीं अधिक गंभीर निकला।
कैसे खुला मामला।
वन परिक्षेत्र अधिकारी विक्रांता सिंह कंवर ने थाना सिविल लाइन में रिपोर्ट दर्ज कराई कि सीएसईबी रामपुर स्थित जूनियर क्लब के पास राजस्व क्षेत्र में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की अनुमति से कुल 207 वृक्षों की कटाई चल रही थी। इनमें से 7 वृक्षों की कटाई 29 जून 2026 को की गई थी, जबकि शेष वृक्षों की कटाई ठेका व्यवस्था के तहत कराई जा रही थी।
14 जुलाई 2026 को शाम 4:35 बजे कार्यपालन अभियंता तारामणी तिग्गा ने सूचना दी कि एक वाहन में कटे हुए 7 वृक्षों के लट्ठे लोड किए जा रहे हैं। मौके पर पहुंचने से पहले वाहन निकल चुका था। पूछताछ में ठेकेदार सुनील कुमार गुप्ता ने लकड़ी को अपने वाहन से अभनपुर भेजे जाने की बात स्वीकार की। इसके बाद वन विभाग ने लगभग 2 लाख रुपये मूल्य की लकड़ी चोरी होने की रिपोर्ट दर्ज कराई।
पुलिस की कार्रवाई।
रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी के निर्देशन और एएसपी लखन पटले व सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में थाना सिविल लाइन प्रभारी प्रशिक्षु डीएसपी आस्था शर्मा के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई।
जांच में पता चला कि लकड़ी को कोरबा से रायपुर-अभनपुर क्षेत्र तक पहुंचा दिया गया है। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपी सुनील कुमार गुप्ता को गिरफ्तार किया। थाना सिविल लाइन में अपराध क्रमांक 673/2026 के तहत BNS की धारा 303(2), 316(5) एवं 317(2) के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
9 लाख की लकड़ी और 1 क्रेन बरामद।
यहीं से मामला नया मोड़ ले गया। प्रदेश स्तर पर गठित जांच दल ने कार्रवाई कर लगभग 20.169 घन मीटर इमारती लकड़ी बरामद की, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 9 लाख रुपये है। साथ ही 1 क्रेन भी जब्त की गई।
अब सवाल यह है कि जब प्रारंभिक रिपोर्ट 7 पेड़ और 2 लाख रुपये की थी, तो 9 लाख रुपये की लकड़ी आखिर कहां से आई?
अन्य कॉलोनियों पर भी सवाल।
इस बीच सीएसईबी की अन्य कॉलोनियों को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। कोरबा पश्चिम सहित कई स्थानों पर पुराने आवास तोड़ने के साथ साल, सरई और अन्य बेशकीमती वृक्षों की कटाई वन विभाग की अनुमति से हो रही है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार कोरबा पश्चिम स्थित सीएसईबी आवासीय परिसर से कुछ लकड़ियां मात्र 5 रुपये प्रति किलो की दर से लोगों को दिए जाने की चर्चा है। साथ ही कुछ लोगों द्वारा अवैध वसूली और “ट्रीप हिसाब” के नाम पर पैसा वसूले जाने के आरोप भी लगे हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अब जांच के केंद्र में ये सवाल।
1. 7 पेड़ों की लकड़ी का मामला 9 लाख की बरामदगी तक कैसे पहुंचा?
2. कोरबा से 250 किमी दूर लकड़ी किसके संरक्षण में पहुंची?
3. क्या इसमें केवल एक व्यक्ति शामिल है या कोई बड़ा गिरोह सक्रिय है?
4. सीएसईबी की अन्य कॉलोनियों से निकली लकड़ियों का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित है?
5. क्या अन्य स्थानों पर भी इसी तरह की अनियमितताओं की जांच होगी?
फिलहाल पुलिस और वन विभाग मामले की विवेचना कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि यह सिर्फ चोरी थी या बेशकीमती इमारती लकड़ियों के अवैध कारोबार का बड़ा नेटवर्क।
