
कोरबा/पाली(आई.बी.एन- 24 )विश्व मूलनिवासी दिवस के मौके पर रविवार को पाली का माहौल पूरी तरह आदिवासी रंग में रंगा नजर आया। ढोल-मांदल की गूंज और पारंपरिक वेशभूषा में सजे हजारों आदिवासी भाई-बहनों ने एकता का ऐसा संदेश दिया जिसे देखकर हर कोई गर्व से भर गया।
कार्यक्रम का नेतृत्व क्षेत्रीय विधायक तुलेश्वर सिंह मरकाम ने किया। उनके सानिध्य में हुए इस भव्य आयोजन में आदिवासी समाज को केवल जश्न मनाने के लिए नहीं, बल्कि अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति “जागरूक और संगठित” होने का संकल्प दिलाया गया।
शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो”
सभा को संबोधित करते हुए विधायक मरकाम ने कहा कि _”9 अगस्त सिर्फ एक तारीख नहीं है। यह बिरसा मुंडा, टंट्या भील और मानगढ़ के उन शहीदों की कुर्बानी को याद करने का दिन है जिन्होंने जल-जंगल-जमीन के लिए अपनी जान दी। आज हमें सरकार की हर योजना, पेसा कानून, वन अधिकार अधिनियम और 5वीं अनुसूची को समझकर उसका लाभ लेना होगा।”
उन्होंने युवाओं से नशा छोड़कर शिक्षा और खेल में आगे आने का आह्वान किया और कहा अगर समाज को आगे बढ़ाना है तो बेटी को पढ़ाना होगा।”
उमड़ा जनसैलाब, गूंजे लोकगीत
कार्यक्रम स्थल पर सुबह से ही भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। आदिवासी समाज के विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता बैनर-पोस्टर के साथ शामिल हुए। शोभायात्रा में शामिल महिलाओं के सिर पर मटकी और हाथों में तीर-कमान आकर्षण का केंद्र रहे। मंच पर घूमर, गवरी और सुआ नृत्य की प्रस्तुतियों ने माहौल को और जीवंत कर दिया।
आयोजकों ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ना और उन्हें उनके हक-अधिकारों की जानकारी देना था।
कार्यक्रम के अंत में सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे अपनी भाषा, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा एकजुट रहेंगे।