
कोरबा (आई.बी.एन-24)। छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने 9 सितंबर 2026 को प्रदेश के तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों के तबादले का बड़ा आदेश जारी किया था। आदेश क्रमांक ESTB/28202/2026-REVENUE-7-2 में साफ-साफ लिखा था कि सभी तबादले तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।
इस आदेश में कोरबा में पदस्थ तहसीलदार श्री भूपन सिंह मंडावी का तबादला प्रशासनिक आधार पर कोरबा से सरगुजा कर दिया गया था। वहीं उनकी जगह सरगुजा से श्री उमेश्वर सिंह बाग को कोरबा भेजा गया था।

लेकिन आदेश जारी हुए करीब 2 महीने बीत चुके हैं, इसके बाद भी पाली में हालात जस के तस बताए जा रहे हैं।
क्या है पूरा मामला…?
सूत्रों और स्थानीय लोगों का दावा है कि तबादला आदेश आने के बाद भी भूपन सिंह मंडावी ने पाली तहसीलदार की कुर्सी नहीं छोड़ी है। बताया जा रहा है कि वे आज भी पाली ब्लॉक में ही तहसीलदार के रूप में कामकाज देख रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब शासन का आदेश आ गया है, तो फिर तबादला लागू क्यों नहीं हो रहा है? क्या तहसीलदार को किसी बड़े अधिकारी का संरक्षण प्राप्त है, या फिर विभागीय लापरवाही के कारण आदेश सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गया है?
आम जनता परेशान
पाली तहसील में रोजाना जमीन, नामांतरण, जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र और राजस्व से जुड़े सैकड़ों कामों के लिए ग्रामीण आते हैं। लोगों का कहना है कि अगर अधिकारी का तबादला हो गया है, तो उन्हें नई जगह ज्वाइन करना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं होने से लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है कि आखिर पाली का असली तहसीलदार कौन है?
अब आगे क्या…?
अब सबकी नजर जिला प्रशासन कोरबा पर टिकी हुई है। क्या प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेगा और तबादला आदेश को जमीन पर लागू कराएगा? या फिर यह आदेश भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?
पाली की जनता अब यही पूछ रही है – जब ट्रांसफर हो गया, तो साहब गए क्यों नहीं?
