
करतला/कोरबा (आई.बी.एन -24) जिला पंचायत कोरबा द्वारा ग्राम पंचायत कथरीमाल के रोजगार सहायक श्री धनाऊ दिवाकर को प्रभारी ग्राम पंचायत गुमिया के पद से पृथक करने के स्पष्ट आदेश के बावजूद अब तक उन्हें पद से नहीं हटाए जाने का मामला सामने आया है। जिला पंचायत के आदेश में तीन दिवस के भीतर कार्रवाई कर कार्यालय को अवगत कराने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन आदेश जारी होने के बाद भी आज तक कार्रवाई नहीं होने से आदेश के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
21 सितंबर को जारी हुआ था आदेश
जिला पंचायत कोरबा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा 21 सितंबर 2026 को जारी पत्र क्रमांक /I/379743/2026/जि.पं./शिका. में जनपद पंचायत करतला के मुख्य कार्यपालन अधिकारी/कार्यक्रम अधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे।
आदेश में कहा गया था कि जनपद पंचायत करतला से प्राप्त प्रस्ताव के अनुसार श्री धनाऊ दिवाकर, रोजगार सहायक, प्रभारी ग्राम पंचायत गुमिया को नियमानुसार पद से पृथक कर जिला पंचायत कार्यालय को 03 दिवस के भीतर अवगत कराना सुनिश्चित करें।
गंभीर वित्तीय अनियमितता का उल्लेख।
जिला पंचायत के आदेश में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से ग्राम पंचायत गुमिया से प्राप्त शिकायतों का उल्लेख किया गया है। आदेश के अनुसार शिकायत क्रमांक CC26070120587 दिनांक 27 जुलाई 2026, CC260700127901 दिनांक 31 जुलाई 2026 एवं CC260800148187 दिनांक 13 अगस्त 2026 के संबंध में मामला सामने आया था।
आदेश में उल्लेख है कि रोजगार सहायक द्वारा शासकीय योजनाओं में किसी हितग्राही की मजदूरी राशि अन्य व्यक्तियों के बैंक खातों में अंतरित किया जाना अत्यंत गंभीर वित्तीय कदाचार एवं नियमों के सर्वथा विपरीत है। साथ ही प्रस्तुत जवाब को भी संतोषप्रद नहीं बताया गया है।
तीन दिन में कार्रवाई का निर्देश, फिर भी कार्रवाई कहां?
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जिला पंचायत कोरबा ने कार्रवाई के लिए सिर्फ तीन दिवस की समय-सीमा निर्धारित की थी। आदेश में कार्रवाई पूर्ण कर जिला पंचायत कार्यालय को इसकी जानकारी देने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे।
लेकिन आज 07 अक्टूबर 2026 तक भी यदि श्री धनाऊ दिवाकर को प्रभारी ग्राम पंचायत गुमिया के पद से पृथक नहीं किया गया है, तो जिला पंचायत के आदेश के पालन को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े होना स्वाभाविक है।
किसके संरक्षण में आदेश की अनदेखी…?
मामला अब केवल रोजगार सहायक को पद से हटाने तक सीमित नहीं रह गया है। सवाल यह है कि जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा लिखित आदेश जारी किए जाने के बावजूद संबंधित स्तर पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
यदि आदेश का पालन नहीं हुआ है, तो यह भी जांच का विषय है कि आदेश के अनुपालन की जिम्मेदारी किस अधिकारी की थी और निर्धारित समय-सीमा बीतने के बाद भी कार्रवाई क्यों लंबित रखी गई।
कलेक्टर को भी भेजी गई थी आदेश की प्रतिलिपि
जिला पंचायत के आदेश की प्रतिलिपि कलेक्टर, जिला कोरबा को भी सूचनार्थ भेजी गई है। ऐसे में अब जिला प्रशासन की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि आदेश के बावजूद संबंधित कर्मचारी अभी भी उसी पद पर कार्यरत हैं, तो प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि जिला पंचायत के आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ।
अब उठ रहे ये बड़े सवाल…?
तीन दिवस में कार्रवाई के आदेश के बावजूद आज तक पद से क्यों नहीं हटाया गया?
जिला पंचायत के आदेश का पालन कराने की जिम्मेदारी किस अधिकारी की थी?
क्या आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट जिला पंचायत को भेजी गई है?
यदि रिपोर्ट भेजी गई है तो उसमें क्या कार्रवाई दर्शाई गई है?
यदि कार्रवाई नहीं हुई, तो जिम्मेदार अधिकारी पर क्या कार्रवाई होगी?
आई.बी.एन.-24 की पड़ताल का सीधा सवाल:
“जब जिला पंचायत ने तीन दिन में हटाने का आदेश दिया, तो 07 अक्टूबर तक भी रोजगार सहायक पद पर कैसे बने हुए हैं?”
अब इस पूरे मामले में जनपद पंचायत करतला एवं जिला प्रशासन की जवाबदेही सबसे अहम हो गई है।
