
रायपुर/नई दिल्ली। नई दिल्ली में 1 और 2 सितंबर को आयोजित होने वाले जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार के विभागीय शिखर सम्मेलन में छत्तीसगढ़ को दोहरी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है। देशभर के राज्यों के जल संसाधन मंत्रियों एवं सचिवों की मौजूदगी में आयोजित इस राष्ट्रीय सम्मेलन में थीम-2 ‘कैच द रेन—जल संचय जनभागीदारी’ के राष्ट्रीय सत्र के समापन की प्रस्तुति छत्तीसगढ़ करेगा।
सम्मेलन के दूसरे दिन छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री राज्य की ओर से 30 मिनट की समापन प्रस्तुति देंगे। इसमें प्रदेश की जल संचय कार्य-संस्कृति, नवाचार और जनभागीदारी के मॉडल को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा।
इसके बाद आयोजित समापन सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में मुख्यमंत्री देशभर में ‘कैच द रेन’ अभियान से जुड़े विचार-विमर्श का समाहार प्रस्तुत करेंगे। मुख्यमंत्री थीम-2 के सर्वसम्मत एवं समयबद्ध कार्य-बिंदु भी प्रधानमंत्री और देशभर से आए मंत्रीगण एवं सचिवों के समक्ष रखेंगे।
जल संरक्षण में छत्तीसगढ़ की अहम भागीदारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘जल जहां गिरे, जब गिरे—वहीं संचय करें’ के आह्वान से शुरू हुआ ‘कैच द रेन’ अभियान आज बड़े जन-नेतृत्व वाले जल संरक्षण आंदोलन का रूप ले चुका है। जल संचय जनभागीदारी अभियान के पहले चरण में 10 लाख के लक्ष्य के विरुद्ध 27.6 लाख संरचनाएं बनीं, जबकि दूसरे चरण में एक करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 1.5 करोड़ से अधिक संरचनाएं दर्ज की गईं। अब 31 मई 2027 तक दो करोड़ नई जल संरक्षण संरचनाएं बनाने का राष्ट्रीय लक्ष्य रखा गया है।
इस राष्ट्रीय अभियान में छत्तीसगढ़ भी अग्रणी राज्यों में शामिल है। JSJB 2.0 के तहत प्रदेश में 24.07 लाख से अधिक जल संरक्षण संरचनाएं दर्ज की गई हैं। कोरिया जिले से शुरू हुआ छत्तीसगढ़ का ‘5 प्रतिशत मॉडल’—जिसमें किसान स्वेच्छा से अपनी भूमि का पांच प्रतिशत हिस्सा जल पुनर्भरण संरचनाओं के लिए समर्पित करते हैं—जल शक्ति मंत्रालय के राष्ट्रीय दस्तावेज में भी स्थान पा चुका है। वहीं ‘मोर गांव, मोर पानी’ जैसे अभियानों ने पंचायत स्तर पर जल-योजना को जनभागीदारी से जोड़ने का काम किया है।
‘हर उस हाथ का सम्मान, जिसने गांव में पानी रोका’
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय मंच पर मिली यह जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ के उन सभी लोगों का सम्मान है, जिन्होंने अपने गांवों में पानी रोकने के लिए काम किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘कैच द रेन’ आह्वान को प्रदेश के किसानों, महिलाओं और युवाओं ने जनआंदोलन में बदल दिया है और राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ उन्हीं की आवाज लेकर जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ की राह जल-सुरक्षित भारत से होकर जाती है और छत्तीसगढ़ इस यात्रा में कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रहा है।
सम्मेलन में जल अधोसंरचना, पेयजल स्रोत स्थायित्व तथा ग्रामीण पेयजल संचालन-संधारण जैसे तीन अन्य विषयों पर भी विभिन्न राज्यों की प्रस्तुतियां होंगी।