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माता यशोदा सम्मान समारोह “मातृ दुग्ध दान, ममता सर्वोच्च सम्मान। विश्व स्तनपान दिवस पर माताओं, गर्भवती-शिशुवती महिलाओं एवं मितानिनों का रंजना मे सम्मान किया गया।

कटघोरा (आई. बी. एन -24) विश्व स्तनपान दिवस के अवसर पर विकासखंड कटघोरा के ग्राम आदर्श पंचायत रंजना स्वस्थ्य मितानिन कार्यक्रम के तत्वावधान में “माता यशोदा सम्मान समारोह — मातृ दुग्ध दान, ममता सर्वोच्च सम्मान” कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मातृ दुग्ध के महत्व को जन-जन तक पहुंचाना, माताओं को छह माह तक केवल स्तनपान के लिए प्रेरित करना, गर्भवती एवं शिशुवती महिलाओं को स्वास्थ्य एवं पोषण के प्रति जागरूक करना तथा ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सक्रिय भूमिका निभाने वाली मितानिनों के योगदान को सम्मानित करना रहा।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष श्री पवन सिंह जी अपरिहार्य कारणों से कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो सके। उन्होंने वीडियो कॉल के माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डाला तथा कार्यक्रम में उपस्थित सभी माताओं एवं कार्यकर्ताओं को शुभकामनाएं दीं।

अतिथियों ने मातृ दुग्ध एवं मातृ-शिशु स्वास्थ्य के महत्व पर रखे विचार

श्रीमती रुक्मणी यादव, ब्लॉक समन्वयक ने माता यशोदा के वात्सल्य का उदाहरण देते हुए कहा कि मां और बच्चे के बीच प्रेम एवं भावनात्मक जुड़ाव स्वस्थ समाज की मजबूत नींव है।

श्री रवि राजक, जिला पंचायत प्रतिनिधि ने कहा कि मां का दूध बच्चे के लिए प्रकृति का सर्वोत्तम आहार है। यह बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

श्री राजेश यादव, प्रदेश सह संयोजक, भाजपा झुग्गी-झोपड़ी प्रकोष्ठ ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्तनपान को लेकर व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने के लिए पंचायत स्तर पर निरंतर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए। मातृ दुग्ध केवल बच्चे का पोषण नहीं, बल्कि उसके स्वस्थ भविष्य की पहली नींव है।

सुश्री वंदना गुप्ता, जिला समन्वयक मितानिन ने कहा कि शिशु को जन्म से छह माह तक केवल मां का दूध दिया जाना चाहिए। इसके बाद पूरक आहार के साथ स्तनपान जारी रखना बच्चे के बेहतर विकास के लिए लाभकारी है।

डॉ. कृष्णा कुमार जायसवाल, पीएचसी संजरी ने कहा कि जन्म के पहले एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू कराना नवजात के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

श्रीमती ममता मरकाम, सरपंच ने माताओं से मितानिन एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से नियमित मार्गदर्शन लेने और स्तनपान को लेकर किसी भी भ्रांति से बचने की अपील की।

श्रीमती विद्या मरावी, जनपद सदस्य ने कहा कि माता यशोदा जैसी ममतामयी माताओं का सम्मान करना वास्तव में मातृत्व और ममता का सम्मान है। स्वस्थ मां ही स्वस्थ परिवार और स्वस्थ पंचायत का निर्माण कर सकती है।

श्री जागेश्वर सिंह, मोहनपुर ने कहा कि माताएं आने वाली पीढ़ी का निर्माण करती हैं, इसलिए उनके स्वास्थ्य और पोषण की जिम्मेदारी पूरे समाज की है।

श्री नन्द कुमार, प्राचार्य ने कहा कि बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए शिक्षा के साथ-साथ उचित पोषण भी आवश्यक है।

श्री पुलस्त जी, व्याख्याता ने माता यशोदा और भगवान कृष्ण के संबंध को प्रेम, वात्सल्य और त्याग का प्रतीक बताया।

श्रीमती लीला पिल्ले, SPS/स्वस्थ पंचायत ने कहा कि स्वस्थ पंचायत की कल्पना स्वस्थ मां और स्वस्थ बच्चे के बिना पूरी नहीं हो सकती।

कार्यक्रम का संचालन श्री ओमप्रकाश डिकसेना जी ने किया। उन्होंने कहा कि “माता यशोदा सम्मान केवल एक महिला का सम्मान नहीं, बल्कि ममता, त्याग और मातृत्व की भावना का सम्मान है।”

9 हितग्राही माताओं को माता यशोदा सम्मान

समारोह में माता यशोदा की भूमिका निभाने वाली 9 हितग्राही माताओं को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। उन्हें सम्मान प्रमाण पत्र, श्रीफल, फूलमाला एवं सम्मान सामग्री भेंट कर उनके मातृत्व और ममता को नमन किया गया।

इसके साथ ही गर्भवती एवं शिशुवती महिलाओं को भी सम्मानित कर सुरक्षित मातृत्व एवं स्वस्थ शिशु के लिए शुभकामनाएं दी गईं।

मितानिनों के सेवाभाव को भी मिला सम्मान

स्वास्थ्य के क्षेत्र में जन-जन तक पहुंचकर सक्रिय भूमिका निभाने वाली मितानिन बहनों को भी समारोह में सम्मानित किया गया। मितानिनें गर्भवती महिलाओं की देखभाल, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, पोषण एवं स्वास्थ्य जागरूकता के क्षेत्र में गांवों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

मितानिनों को प्रमाण पत्र, श्रीफल एवं फूलमाला भेंट कर उनके सेवाभाव और जमीनी स्तर पर किए जा रहे कार्यों के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया।

मातृ दुग्ध दान का लिया संकल्प

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने मातृ दुग्ध के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने, जन्म से छह माह तक शिशु को केवल स्तनपान कराने तथा स्तनपान को लेकर समाज में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर संदेश दिया गया कि मां का दूध केवल आहार नहीं, बल्कि शिशु के जीवन की पहली सुरक्षा, पहला पोषण और मां की ममता का सर्वोच्च उपहार है।

कार्यक्रम में रहे उपस्थित

कार्यक्रम में श्री पवन सिंह, श्री रवि राजक, श्रीमती ममता मरकाम, श्री जागेश्वर सिंह, श्रीमती विद्या मरावी, सुश्री वंदना गुप्ता, डॉ. कृष्णा कुमार जायसवाल, श्री राजेश यादव, श्री नन्द कुमार, श्री पुलस्त जी, श्रीमती रुक्मणी यादव, श्री ओमप्रकाश डिकसेना, श्रीमती लीला पिल्ले सहित बड़ी संख्या में माताएं, गर्भवती एवं शिशुवती महिलाएं, मितानिनें एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

सम्मानित माताओं में दुर्गा बाई, सुखवारी, सुकदई, गोहनदई, सावित्री बाई, रंगीना, हरनबाई, उमा बाई, सरकहा, रुमालिया, रमशिला, श्यामबाई, सावित्री, किशोरी बाई, जागृति, केशो बाई, कल्याणी जगत, धुराजा यादव, अनीता केंवट, पदमनी, जमकुमारी, शिवकुमारी, उमा, रामकुंवर, आशा सहित अन्य माताएं शामिल रहीं।

“मातृ दुग्ध दान, ममता सर्वोच्च सम्मान” के संदेश के साथ आयोजित यह समारोह मातृत्व के सम्मान और मातृ-शिशु स्वास्थ्य के प्रति सामाजिक जागरूकता का प्रेरणादायक कार्यक्रम रहा।

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