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जेल की सलाखों से जनपद के रणक्षेत्र तक: अक्षय गर्ग हत्याकांड के आरोपी ने पोड़ी उपरोड़ा से भरा नामांकन, सियासी भूचाल।

बिलासपुर केंद्रीय जेल से कड़ी सुरक्षा में लाया गया मुख्य आरोपी मुस्ताक अहमद, बिझरा जनपद उपचुनाव बना कानून-नैतिकता की बहस का केंद्र।

कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा (आई.बी.एन -24) जनपद पंचायत पोड़ी उपरोड़ा के बिझरा क्षेत्र में हो रहा उपचुनाव उस समय प्रदेशभर की सियासत के केंद्र में आ गया, जब भाजपा के पूर्व जनपद उपाध्यक्ष स्व. अक्षय गर्ग हत्याकांड का मुख्य आरोपी मुस्ताक अहमद बिलासपुर केंद्रीय कारागार से पुलिस सुरक्षा में लाकर जनपद सदस्य पद के लिए नामांकन दाखिल करता दिखा।

मामला क्या है : दिसंबर 2025 में भाजपा नेता अक्षय गर्ग की दिनदहाड़े धारदार हथियार से हत्या कर दी गई थी। इस सनसनीखेज वारदात ने पूरे कोरबा जिले को हिला दिया था। पुलिस जांच में राजनीतिक रंजिश और पुरानी दुश्मनी का एंगल सामने आया था। मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें मुस्ताक अहमद भी शामिल है। वह वर्तमान में न्यायिक हिरासत के तहत बिलासपुर केंद्रीय जेल में निरुद्ध है।

नामांकन कैसे हुआ: उपचुनाव के अंतिम दिन जिला प्रशासन, पुलिस और विधिक प्रक्रिया की निगरानी में आरोपी को पोड़ी उपरोड़ा निर्वाचन कार्यालय लाया गया। कड़ी सुरक्षा के बीच मुस्ताक अहमद ने विधिवत अपना नामांकन पत्र प्रस्तुत किया। हत्या जैसे संगीन मामले में जेल में बंद व्यक्ति का चुनाव मैदान में उतरना क्षेत्र में तीखी सियासी बहस छेड़ गया है।

कानूनी पक्ष क्या कहता है: जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को केवल आरोपित होने भर से चुनाव लड़ने से नहीं रोका जा सकता। दोषसिद्धि और दो साल या उससे अधिक की सजा होने पर ही सदस्यता व चुनाव लड़ने पर अयोग्यता लागू होती है। न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक आरोपी को नामांकन का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है।

सियासी मायने: पोड़ी उपरोड़ा का यह उपचुनाव अब केवल स्थानीय सीट की लड़ाई नहीं रहा। यह लोकतंत्र, कानून और नैतिकता के टकराव का प्रतीक बन गया है। एक पक्ष इसे संविधान प्रदत्त अधिकार और लोकतांत्रिक प्रक्रिया बता रहा है। वहीं दूसरा पक्ष इसे राजनीति में अपराधीकरण और सामाजिक मूल्यों के क्षरण से जोड़कर देख रहा है।

फिलहाल क्षेत्र की निगाहें तीन मोर्चों पर टिकी हैं – न्यायालय में चल रहा हत्याकांड का ट्रायल, जनता की अदालत यानी बैलेट बॉक्स, और सियासी रणक्षेत्र। उपचुनाव की तारीख घोषित होते ही प्रचार और तेज होने की उम्मीद है।

 

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