
कोरबा (आई.बी.एन -24) ओमपुर मे श्रीमद्भागवत महापुराण ईश्वर कण-कण में विद्यमान है. ईश्वर की प्राप्ति के लिए संसार को छोड़ने की जरूरत नहीं है बल्कि अपने मन से ईश्वर से रिश्ता जोड़ने की है.
ओमपुर(रजगामार) में स्व राधे श्याम साहू की स्मृति में साहू परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत गीता ज्ञान यज्ञ सप्ताह में कथा व्यास वाचिक बाल विदुषी प्रज्ञा एवं पंकजा ने भक्त प्रहलाद चरित्र ,ध्रुव चरित्र की कथा श्रवण कराते हुए कहा कि ईश्वर की प्राप्ति किसी भी उम्र में हो सकती है.उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा में श्रीकृष्ण लीलाएं (बाललीला से द्वारकाधीश तक) ईश्वर के प्रेम, धर्म स्थापना और दिव्य स्वरूप को दर्शाती हैं. पूतना वध, माखन चोरी, गोवर्धन धारण, रासलीला, और कंस वध जैसी लीलाएं मनमोहक वात्सल्य और भक्ति का अनूठा मिश्रण हैं. ये लीलाएं भक्तों को ज्ञान, वैराग्य और निश्छल प्रेम का संदेश देती हैं.श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया गया. इस मौके पर संगीतमय कथा वाचन कर भगवान की बाल लीलाओं के चरित्र का वर्णन किया.श्रोताओं से कहा कि लीला और क्रिया में अंतर होती है. अभिमान तथा सुखी रहने की इच्छा प्रक्रिया कहलाती है. इसे ना तो कर्तव्य का अभिमान है और ना ही सुखी रहने की इच्छा, बल्कि दूसरों को सुखी रखने की इच्छा को लीला कहते हैं.भगवान श्रीकृष्ण ने यही लीला की, जिससे समस्त गोकुलवासी सुखी और संपन्न थे.उन्होंने कहा कि माखन चोरी करने का आशय मन की चोरी से है.कन्हैया ने भक्तों के मन की चोरी की. उन्होंने तमाम बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए उपस्थित श्रोताओं को वात्सल्य प्रेम में सराबोर कर दिया.कथा का समापन 28 मार्च को पूर्ण आहुति के साथ होगा।