
कटघोरा (आई.बी.एन -24) कटघोरा नगर में स्थापित भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा निर्माण में कथित अनियमितताओं के मामले में छत्तीसगढ़ शासन ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए नगर पालिका परिषद कटघोरा के उप अभियंता श्री चंद्र प्रकाश जायसवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास, नवा रायपुर द्वारा 31 जुलाई 2026 को जारी आदेश में यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ नगर पालिका कर्मचारी (भर्ती तथा सेवा शर्तें) नियम, 1968 के नियम 53 के तहत की गई है।
इससे पहले 29 जुलाई 2026 को संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय कार्यालय, बिलासपुर द्वारा शासन को भेजे गए जांच प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया था कि कटघोरा के अटल परिसर में स्थापित प्रतिमा का निर्माण स्वीकृत प्राक्कलन के प्रावधानों के विपरीत किया गया है। जांच में यह भी पाया गया कि प्रतिमा के विभिन्न भागों से परत उखड़ रही है, उसकी सतह क्षतिग्रस्त है तथा वह कांस्य प्रतिमा के निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं है। जांच प्रतिवेदन में निर्माण प्रक्रिया के दौरान हुई अनियमितताओं के लिए उप अभियंता श्री चंद्र प्रकाश जायसवाल को उत्तरदायी माना गया।
उल्लेखनीय है कि 30 जुलाई 2026 को भाजपा किसान मोर्चा, जिला कोरबा के जिला कार्यकारिणी सदस्य अशोक तिवारी ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), कटघोरा को लिखित आवेदन देकर प्रतिमा निर्माण में कथित अनियमितताओं एवं भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की मांग की थी। आवेदन में कहा गया था कि यदि शिकायतें सही हैं तो यह सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला है और पूरे प्रकरण की पारदर्शी जांच कर दोषी व्यक्ति, संस्था अथवा एजेंसी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
शासन द्वारा जारी निलंबन आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि में श्री जायसवाल का मुख्यालय संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय कार्यालय, नगरीय प्रशासन एवं विकास, दुर्ग निर्धारित किया गया है तथा उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। आदेश की प्रतिलिपि नगरीय प्रशासन विभाग, कलेक्टर कोरबा, संबंधित संयुक्त संचालकों, नगर पालिका परिषद कटघोरा तथा अन्य संबंधित अधिकारियों को भी प्रेषित की गई है।
हालांकि, निलंबित उप अभियंता श्री चंद्र प्रकाश जायसवाल ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए कहा है कि प्रतिमा का निर्माण संबंधित निर्माणकर्ता द्वारा कराया गया था तथा गुणवत्ता परीक्षण की रिपोर्ट भी निर्माणकर्ता द्वारा उपलब्ध कराई गई थी। उनका कहना है कि उन्होंने उपलब्ध अभिलेखों और प्रक्रिया के अनुसार कार्य किया तथा इस मामले में उनकी कोई व्यक्तिगत लापरवाही नहीं है।
इधर स्थानीय स्तर पर यह मांग भी उठ रही है कि यदि जांच में ठेकेदार, निर्माण एजेंसी अथवा अन्य अधिकारियों की भी भूमिका सामने आती है, तो उनके विरुद्ध भी निष्पक्ष जांच कर समान रूप से वैधानिक कार्रवाई की जाए, ताकि पूरे मामले में पारदर्शिता बनी रहे और वास्तविक दोषियों की जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।