पत्रकारिता की साख पर सवाल: झोलाछाप पत्रकारों की बढ़ती गतिविधियों से खतरा।

जांजगीर-चांपा (आई.बी.एन -24) न्यूज एजेंसी।गाँवों तक सूचना पहुँचाने वाली पत्रकारिता कभी जनविश्वास की सबसे मजबूत कड़ी मानी जाती थी, लेकिन अब उसी पेशे के नाम पर कुछ तथाकथित “झोलाछाप पत्रकार” लोगों की गतिविधियाँ पूरे मीडिया जगत की साख पर सवाल खड़े कर रही हैं। सरपंचों और पंचायत सचिवों से अवैध वसूली, डर दिखाकर खबर छापने की धमकी और सूचना के अधिकार का दुरुपयोग ये प्रवृत्तियाँ सिर्फ अपराध नहीं बल्कि लोकतंत्र की बुनियाद पर चोट हैं।

पत्रकारिता केवल माइक या कैमरा पकड़ लेने से नहीं आती, इसके मूल में तथ्य, संतुलन, और 5W1H जैसी बुनियादी समझ होती है। जब बिना प्रशिक्षण, बिना जवाबदेही और बिना नैतिकता के लोग इस पेशे का चोला पहनते हैं, तो असली पत्रकारों की मेहनत और जनता का भरोसा दोनों कमजोर पड़ते हैं।
फर्जी पोर्टल संचालक ऐसे कृत्य को बखूबी निभा रहे हैं, जिससे केवल वसूली का धंधा बना लिया है। समय की मांग है कि मीडिया संगठनों की जवाबदेही तय हो, फर्जी पहचान पर सख्ती हो और पत्रकारिता को पेशेवर मानकों से जोड़ा जाए। क्योंकि यदि भरोसा टूट गया, तो खबर और अफवाह के बीच की रेखा मिट जाएगी और यह किसी भी समाज के लिए सबसे खतरनाक स्थिति होगी।